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Chandigarh News: एक साल में 1829 संपत्तियों का ऑटो-म्यूटेशन, 1800 मामले सात दिन में निपटाए

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चंडीगढ़। चंडीगढ़ प्रशासन के एस्टेट ऑफिस की ऑटो-म्यूटेशन व्यवस्था से संपत्ति से जुड़ी सेवाएं आसान हो गई हैं। 7 जुलाई 2025 को शुरू की गई इस व्यवस्था को एक वर्ष पूरा हो चुका है। इसके तहत अब संपत्ति की रजिस्ट्री होने के बाद म्यूटेशन के लिए अलग से आवेदन करने या एस्टेट ऑफिस के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं है। रजिस्ट्री के बाद संबंधित संपत्ति का विवरण इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से एस्टेट ऑफिस पहुंच जाता है और म्यूटेशन की प्रक्रिया डिजिटल तरीके से पूरी की जाती है।
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रजिस्ट्री के बाद अपने आप शुरू होती है प्रक्रिया
ऑटो-म्यूटेशन सिस्टम के तहत सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में प्रॉपर्टी डीड रजिस्टर्ड होते ही उसका डेटा इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से एस्टेट ऑफिस के साथ साझा हो जाता है। इसके बाद म्यूटेशन की प्रक्रिया खुद शुरू हो जाती है। इससे नागरिकों को अलग से म्यूटेशन आवेदन, फॉर्म या दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं रहती। प्रशासन के अनुसार यह पूरी प्रक्रिया फेसलेस और पेपरलेस है। संपत्ति मालिक को म्यूटेशन के लिए एस्टेट ऑफिस में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे नागरिकों का समय बचने के साथ कागजी कार्रवाई और विभागीय स्तर पर अनावश्यक देरी भी कम हुई है।
1829 मामलों में से करीब 1800 का निपटारा
7 जुलाई 2025 को व्यवस्था लागू होने के बाद से अब तक कुल 1829 म्यूटेशन मामले प्राप्त हुए हैं। इनमें से करीब 1800 मामलों का निपटारा संपत्ति की रजिस्ट्री के सात दिनों के भीतर कर दिया गया। शेष 29 मामले निर्धारित समयसीमा के भीतर प्रक्रिया में हैं।
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प्रशासन ने बताया कि अब तक किसी भी आवेदक को म्यूटेशन के लिए एस्टेट ऑफिस में फिजिकल रूप से आने की जरूरत नहीं पड़ी। यह व्यवस्था नागरिक सेवाओं को डिजिटल और अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
लीज होल्ड के लिए दो, फ्रीहोल्ड के लिए सात दिन की समय सीमा
ऑटो-म्यूटेशन सिस्टम में म्यूटेशन के लिए समय सीमा भी निर्धारित की गई है। लीज होल्ड संपत्तियों की म्यूटेशन दो कार्यदिवस में और फ्री होल्ड संपत्तियों की म्यूटेशन सात कार्यदिवस में पूरी करने का प्रावधान है। एसएमएस आधारित ट्रैकिंग सुविधा के जरिए नागरिक अपनी प्रक्रिया की स्थिति की जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं।
एजेंटों और बिचौलियों पर निर्भरता कम
नई व्यवस्था से म्यूटेशन प्रक्रिया में नागरिकों का विभागीय अधिकारियों से सीधा संपर्क भी काफी कम हुआ है। ऑटोमेटेड डेटा एक्सचेंज और ऑनलाइन प्रक्रिया के कारण एजेंटों और बिचौलियों पर निर्भरता कम हुई है। प्रशासन के अनुसार ऑटो-म्यूटेशन सिस्टम ईज ऑफ लिविंग और गुड गवर्नेंस की दिशा में ई-गवर्नेंस सुधार है। इससे संपत्ति रिकॉर्ड को तेजी से अपडेट करने के साथ नागरिकों को सरल, पारदर्शी और सुविधाजनक सेवा उपलब्ध कराई जा रही है।
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