चंडीगढ़। विवाह के लिए जरूरी है कि गुरु और शुक्र उदय रहें। लेकिन इस बार वसंत पंचमी में शुक्र के अस्त होने के बाद भी सिद्ध मुहूर्त होने के कारण विवाह कार्य संपन्न होंगे। वसंत पंचमी 16 फरवरी को है। वसंत पंचमी और प्रथम नवरात्र में शादियां संपन्न होंगी। ऐसा कहना है, चंडीगढ़ में स्थित मंदिरों के पुजारियों का। मंदिरों में गणेश जी को बेटे-बेटियों के विवाह के कार्ड अर्पित करने के लिए भी माता-पिता आ रहे हैं। सेक्टर-30 के शिव शक्ति मंदिर के सभी पुजारी बुक हैं। इस दिन बड़ी संख्या में विवाह कार्य संपन्न होंगे।
देवालय पूजक परिषद के अध्यक्ष और सेक्टर-28 के खेड़ा शिव मंदिर के प्रमुख पुजारी ईश्वर चंद्र शास्त्री ने बताया कि 2020 के दिसंबर से अप्रैल 2021 तक खर (पौष) मास, गुरु अस्त व शुक्र अस्त के कारण विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन, यज्ञोपवीत आदि संस्कारों की कमी है। 15 दिसंबर 2020 से खरमास प्रारंभ हुआ, 17 जनवरी से गुरु अस्त एवं 8 फरवरी से शुक्र अस्त होने के कारण ऐसा हुआ। गुरु अस्त या शुक्र अस्त होते हुए भी जो स्वयं सिद्धमुहूर्त (अनपुछ मुहूर्त) हैं, उनमें भी शादियां कर सकते हैं। 16 फरवरी को वसंत पंचमी है। इस दिन सर्वार्थसिद्धि योग भी है और यह अनपुछ मुहूर्त है।
इसी प्रकार 13 अप्रैल को विक्रमी संवत 2077 का प्रथम दिवस अर्थात पहला नवरात्र भी सिद्धमुहूर्त है और इस दिन सर्वार्थसिद्धि योग भी है, इसलिए 16 फरवरी वसंत पंचमी एवं 13 अप्रैल वैशाखी के दिन शादियां संपन्न होंगी। उनके पास भी 16 फरवरी वसंत पंचमी की दो शादियां बुक हैं। 21 अप्रैल को रामनवमी के दिन भी सिद्ध मुहूर्त है। सेक्टर-39 के शिव शक्ति मंदिर के प्रमुख पुजारी श्याम सुंदर शास्त्री ने कहा कि उनके सभी पुजारी बुक हैं। ये पुजारी नौ शादियां कराएंगे। पांच विवाह दिन में और चार रात्रि लग्न में संपन्न होंगे।
वसंत पंचमी को सर्वार्थसिद्धि योग
सेक्टर-18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी डॉ. लाल बहादुर दुबे का कहना है कि वसंत पंचमी को सवार्थसिद्धि योग और सिद्धियोग के कारण विवाह कार्य संपन्न होंगे। वसंत पंचमी को पूरा दिन और रात सर्वार्थसिद्धि योग हैं। उन्होंने कहा कि उस दिन वे भी विवाह के लिए बुक हैं।
15 कार्ड गणेश जी को किए अर्पित
सेक्टर-32 के प्राचीन हनुमान मंदिर के पुजारी पंडित अभय चंद्र झा ने बताया कि जिनके घरों में बेटे-बेटियों की शादियां हैं, वे मंदिर में आकर गणेश जी को निमंत्रण देने के लिए कार्ड लेकर आ रहे हैं। अब तक 15 से भी अधिक बेटे-बेटियों के माता-पिता गणेश जी को कार्ड अर्पित कर चुके हैं।