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Chandigarh News: शराब ठेकों की नीलामीः दूसरी बार में भी सिर्फ 11 ठेके बिके, सबसे महंगा सिर्फ पांच हजार रुपये ज्यादा बिका

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चंडीगढ़। यूटी प्रशासन के आबकारी व कराधान विभाग को शराब के ठेकों की नीलामी में दूसरी बार भी तगड़ा झटका लगा है। मंगलवार को विभाग ने बचे 52 ठेकों की नीलामी की, जिसमें से सिर्फ 11 ठेके ही बिके। 41 ठेकों के लिए एक भी बोली नहीं आई। सबसे महंगा ठेका खुड्डा लाहौरा का बिका है, जिसके लिए समायरा इंटरनेशनल ने 7.57 करोड़ की बोली लगाई है। हालांकि ये भी आरक्षित मूल्य से महज पांच हजार रुपये ज्यादा में बिका है।आबकारी विभाग ने मंगलवार को 11 ठेकों की नीलामी कर कुल 54 करोड़ 85 लाख 57 हजार 470 रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। हालांकि, इन 11 ठेकों का कुल आरक्षित मूल्य 51 करोड़ 27 लाख 70 हजार 436 रुपये था। विभाग ने नीलामी में आरक्षित मूल्य से तीन करोड़ 57 लाख 87 हजार 34 रुपये ज्यादा कमाए हैं, जो सात फीसदी है। आबकारी विभाग के साथ ऐसा पहली बार हो रहा है कि जब शराब के ठेकों को नीलाम करने में उन्हें इतनी मशक्कत करनी पड़ रही है। पहली बार हुई नीलामी में सिर्फ 43 ठेके बिके थे, जिसके बाद विभाग को उम्मीद थी कि दूसरी बार होने वाली नीलामी में अधिकतर ठेके बिक जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मंगलवार को भी ज्यादातर ठेकों के लिए कोई बोली नहीं आई और 52 में से 41 ठेके नहीं बिके। इसकी वजह से विभाग के अधिकारी चिंतित हैं, क्योंकि एक अप्रैल से इन ठेकों का आवंटन हो जाएगा।
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सेक्टर-37डी का ठेका आरक्षित मूल्य से 1.16 करोड़ रुपये ज्यादा में बिका
मंगलवार को हुई नीलामी में एक ठेके को छोड़कर अन्य पर सिर्फ एक ही बोली आई है। इसमें आरक्षित मूल्य से सबसे ज्यादा दाम में सेक्टर-37डी का ठेका बिका, जिसे ललित ठाकुर ने 7 करोड़ 37 लाख रुपये में खरीदा, जबकि इसका आरक्षित मूल्य 6.20 करोड़ रुपये था। ये ठेका आरक्षित मूल्य से एक करोड़ 16 लाख रुपये ज्यादा में बिका। इसके अलावा सेक्टर-7 मध्य मार्ग मार्केट का ठेका 6 करोड़, सेक्टर-11 के मार्केट का ठेका छह करोड़ 65 लाख, सेक्टर-17 डी मार्केट का ठेका तीन करोड़ 89 लाख, सेक्टर-20सी का ठेका दो करोड़ 45 लाख, सेक्टर-22ए का ठेका 3 करोड़ 33 लाख, सेक्टर-27डी का ठेका तीन करोड़ 51 लाख, सेक्टर-32डी का ठेका चार करोड़ 88 लाख, सेक्टर-35बी मार्केट का ठेका 3 करोड़ 43 लाख, सेक्टर-37डी मार्केट का ठेका 7 करोड़ 37 लाख, डड्डूमाजरा कॉलोनी का ठेका पांच करोड़ 75 लाख और गांव खुड्डा लाहौरा का ठेका 7 करोड़ 56 लाख रुपये में बिका है।

पहली नीलामी में बिके थे 43 ठेके, अब तक सबसे महंगा बिका है पलसौरा का ठेका
आबकारी विभाग ने ठेकों की पहली नीलामी 15 मार्च को की थी, जिसमें 95 ठेकों को रखा गया था लेकिन विभाग सिर्फ 43 बेचने में ही कामयाब हो पाया। ज्यादातर के लिए किसी ने रुचि नहीं दिखाई। दोनों नीलामी में अब तक सबसे महंगा शराब का ठेका पलसौरा का बिका है। जिसका आरक्षित मूल्य 9.60 करोड़ तय किया गया था, जिसे 11.65 करोड़ में कलेर वाइन्स ने खरीदा है। विभाग ने पहली नीलामी में 43 ठेके बेचकर कुल 221.59 करोड़ की कमाई की है, जिनका रिजर्व प्राइस 202.35 करोड़ रुपये तय किया गया था। नई आबकारी नीति के तहत एक अप्रैल से यह शराब के ठेके शहर में शुरू हो जाएंगे।
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अधिकारी बोले- पंजाब की आबकारी नीति की वजह से नहीं बिक रहे ठेके
यूटी प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि चंडीगढ़ के ठेके नहीं बिकने के पीछे का कारण पंजाब की नई आबकारी नीति है, जिसे कोई भी राज्य मुकाबला नहीं कर सकता है, क्योंकि वहां पर वैट और एक्साइज ड्यूटी न के बराबर है। वैट और एक्साइज ड्यूटी बेहद कम होने की वजह से शराब के ठेकेदारों को चंडीगढ़ से ज्यादा मुनाफा पंजाब में मिल रहा है। हालांकि ऐसा नहीं है कि पंजाब में शराब चंडीगढ़ से सस्ती है। वैट और एक्साइज ड्यूटी न होने से ठेकेदारों की कमाई बढ़ गई है। शराब के दाम में ज्यादा फर्क नहीं पड़ा है। बता दें कि दूसरी नीलामी में भी अब तक हर साल सबसे महंगा बिकने वाला धनास का शराब का ठेका नहीं बिका है।
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