लुधियाना के गांव इस्सोवाल में संत रंजीत सिंह ढडरियांवाले के काफिले पर हुए हमले का मामला वीरवार को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गया। याचिकाकर्ता कुलविंदर सिंह और रंजीत सिंह ढडरियांवाले ने 17 मई के हमले की जांच सीबीआई से करवाए जाने की मांग की। वीरवार को याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के जस्टिस फतेहदीप सिंह ने पंजाब सरकार और चंडीगढ़ में सीबीआई के निदेशक को 7 जुलाई के लिए नोटिस जारी किया है।
याचिका में कहा गया है कि वे सिख धर्म के प्रचारक हैं और राज्य में सिखों को ड्रग्स, शराब और अन्य नशे से दूर रहने के प्रति जागरूक करते रहे हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि इन्हीं प्रयासों को कुछ लोग पसंद नहीं कर रहे, जिसके चलते बीती 17 मई को लुधियाना के गांव इस्सोवाल में रंजीत सिंह ढडरियांवाले के काफिले पर योजनाबद्ध तरीके से अंधाधुंध फायरिंग की गई।
याचिका में आगे कहा गया कि इस घटना को लेकर 18 मई को लुधियाना के पीएयू पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी, लेकिन आज तक पुलिस इस मामले में कुछ खास नहीं कर सकी है। याचिका में आरोप लगाया कि पंजाब सरकार इस मामले के मुख्य आरोपियों को बचाने का प्रयास कर रही है।
याचिका में खासतौर पर हरनाम सिंह धुम्मा का नाम लेते हुए कहा गया है कि धुम्मा ने हमले का समर्थन भी किया था। इसके अलावा अब तक पुलिस ने जिन लोगों को गिरफ्तार किया है, उन्होंने भी हमले में इस्तेमाल वाहन धुम्मा का ही होने की बात कही है। इसके बावजूद पुलिस ने अभी तक धुम्मा पर कोई कार्रवाई नहीं की है।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि पुलिस इस मामले में राजनीतिक दबाव में काम कर रही है और हमले के मुख्य आरोपियों को बचाने का प्रयास भी किया जा कहा है। इस आधार पर याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट से मांग की कि पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए। याचिकाकर्ता ने कहा कि उन्हें पंजाब पुलिस की कार्रवाई पर बिल्कुल भरोसा नहीं है।