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पंजाब यूनिवर्सिटी में 26 असिस्टेंट प्रोफेसर्स की नियुक्ति प्रक्रिया पर फिलहाल लगी रोक, जानिए क्यों

Wed, 31 Jul 2019 11:09 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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फाइल फोटो
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पीयू सिंडिकेट की बैठक में 26 असिस्टेंट प्रोफेसर्स की नियुक्तियों पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। मंगलवार को इस मुद्दे को लेकर काफी देर तक बहस होती रही। सदस्यों ने कहा कि यह नियुक्तियां नियमानुसार नहीं निकाली गई हैं। रोस्टर आदि का पालन नहीं किया गया है। इसलिए इन पर रोक लगाई जाए। वीसी प्रो. राजकुमार ने कहा, यह एजेंडे में बिंदु शामिल नहीं है। दूसरे पर बात की जाए। लेकिन मेंबरों के दबाव के कारण इस पर रोक लग गई।
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सिंडिकेट की बैठक जैसे ही शुरू हुई वीसी प्रो. राजकुमार ने सिंडिकेट के मेंबर्स को बताया कि उनकी तबीयत ठीक नहीं थी, लेकिन बैठक महत्वपूर्ण होने के कारण वह आए, इसलिए मीटिंग के एजेंडों पर चर्चा तेजी से कर ली जाए। एजेंडे से पहले मेंबर्स ने 26 शिक्षकों की नियुक्ति का मामला उठा दिया। इस पर बहस हुई। उसके बाद दूसरे बिंदु लिए गए। कर्मचारियों को कैशलेस मेडिकल सेवा देने को मंजूरी मिल गई है।

इसके लिए मोहाली के छह अस्पताल व एक लुधियाना का अस्पताल चयनित किया गया है। इसमें इंडस हॉस्पिटल मोहाली, ग्रिशियन अस्पताल मोहाली, जेपीआई अस्पताल मोहाली, शाल्बी अस्पताल मोहाली, मैक्स अस्पताल मोहाली, आईवी अस्पताल मोहाली व नेमली बस्ती नर्सिंग होम लुधियाना शामिल हैं। इस दौरान सिंडिकेट ने एमए हिस्ट्री संचालन को मंजूरी दे दी है। दयानंद चेयर फॉर वैदिक स्टडीज में सर्टिफिकेट शुरू किए जाने का प्रस्ताव पास हो गया है।
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इसके अलावा तकनीकी स्टाफ के प्रमोशन को मंजूरी दे दी गई है। यूआईएएमएस की चेयरपर्सन प्रो. उपासना सेठ का स्थाईकरण अगली बैठक में तय करने का निर्णय लिया गया। गुरु तेग बहादुर नेशनल कॉलेज दाखा में एमए हिस्ट्री कोर्स सफल न होने के कारण बंद किए जाने का निर्णय लिया गया। साथ ही पूर्व बैठकों के मिनट्स पास किए गए। ऑर्डिनेंस 2020 के लिए रजिस्ट्रार प्रो. करमजीत सिंह को जिम्मा दिया गया।

26वां एजेंडा री-अप्वाइंटमेंट व बीएड और डिग्री कॉलेज प्रिंसिपल की तैनाती को लेकर था। इस पर चर्चा नहीं हो पाई। वीसी ने बैठक स्थगित कर दी और अगली बैठक में बाकी बिंदुओं पर चर्चा करने को कहा।
 

सिंडिकेट मेंबर्स वीसी के खिलाफ, प्रेस वार्ता कर लगाए कई आरोप

वीसी प्रो. राजकुमार के बैठक जल्द समाप्त करने के बाद सिंडिकेट के मेंबर वीसी के खिलाफ खड़े हो गए हैं। उन्होंने प्रेसवार्ता की। मेंबर अशोक गोयल ने कहा कि उन्हें बताया नहीं गया कि बैठक क्यों समाप्त कर दी गई जबकि महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा होनी चाहिए थी। उन्होंने आरोप लगाया कि चार मेंबरों की कमेटी ने 26 शिक्षकों की नियुक्ति के लिए वेकैंसी निकाल दी जो कानूनी प्रक्रिया के तहत नहीं थी। रोस्टर आदि का पालन नहीं किया गया। प्रो. रजत संधीर व पुटा ने इसको लेकर पीयू वीसी को पत्र लिखा था।

पुटा के पत्र का जवाब अब तक नहीं मिला है। सिंडिकेट ने वीसी को नियुक्तियों को लेकर पत्र भी दिया। प्रो. नवदीप गोयल ने कहा, कई विभाग ऐसे हैं जहां नियुक्तियों की जरूरत नहीं थी। बच्चे कम और शिक्षक अधिक हैं वहां भी नियुक्तियां निकाली गई जो सही नहीं है। फिजिक्स विभाग में शिक्षकों की आरक्षित सीट भरी हुई हैं, लेकिन फिर आरक्षित कर दिया गया। मेंबर अशोक गोयल ने कहा, वीसी की उपलब्धता पीयू के लिए कम है। बजट छह माह में लाने के वायदे किए गए थे, लेकिन एक साल में भी कुछ रिजल्ट नहीं दिखे।

उन्होंने कहा, जो भी जांच कमेटी बनें या अन्य कमेेटियां उनमें गिने-चुने लोगों को स्थान दिया जा रहा है। इन नामों को सार्वजनिक किए जाने का सवाल किया तो उन्होंने कहा, नाम बताकर क्या करेंगे वह पहले ही सोए हुए हैं। उन्होंने कहा, सिंडिकेट की बैठक में राष्ट्रगान होता है, लेकिन वह भी नहीं हो पाया।
 
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...आखिर ऐसी नौबत क्यों आ रही

पूर्व वीसी प्रो. एके ग्रोवर के कार्यकाल में भी सिंडिकेट के कुछ मेंबरों ने यही रुख अपनाया था और अब फिर से वही नौबत आ गई। फिर से सिंडिकेट के मेंबर एक तरफ और वीसी अलग हो गए। बुद्धिजीवियों का कहना है कि पीयू को संचालित करने के लिए सभी को अपने स्वार्थ त्यागने होंगे और पीयू के हितों को आगे रखना होगा।

जानकारों का कहना है कि यहां शह और मात का खेल चल रहा है जो पीयू के हित में नहीं है। यह भी कहा कि अगर वीसी ने तबीयत खराब होने की बातें कहीं हैं तो सिंडिकेट के मेेंबर्स को उनकी बात मानते हुए बैठक टालनी चाहिए थी या फिर किसी अन्य सदस्य को प्रमुख मेंबर मानते हुए बैठक की कार्रवाई जारी रखनी चाहिए थी।

दोनों पक्षों को हर बात को गंभीरता से समझना होगा। साथ ही जानकारों ने यह भी कहा है कि वीसी बिना बताए बैठक से गए तो सिंडिकेट मेंबर्स को भी धैर्य का परिचय देना चाहिए था।
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