हरियाणा खेल विभाग में प्रधान सचिव पद पर आईपीएस अफसर को लगाने पर पूर्व प्रधान सचिव, खेल अशोक खेमका ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री मनोहर लाल को पत्र लिखकर हाल ही में जारी आदेशों को दोषपूर्ण बताया है। पत्र में खेमका ने लिखा है कि किसी आईएएस को प्रधान सचिव लगाने के बजाए दूसरे कैडर के अफसर को लगाना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है।
केवल एक कैडर अधिकारी ही कैडर पद ग्रहण कर सकता है। नियमों में स्थापित प्रक्रिया का पालन किए बिना कैडर पद पर नियुक्ति नहीं की जा सकती है। आईएएस के कैडर पद पर नियुक्ति के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाले सिविल सेवा बोर्ड की सिफारिश अनिवार्य है। हालांकि, सरकार के पास सिविल सेवा बोर्ड की सिफारिशों को संशोधित करने या अस्वीकार करने की पूरी शक्तियां हैं।
खेमका के पत्र अनुसार राज्य में प्रधान सचिव का कोई पद रिक्त नहीं है। प्रधान सचिव के कुल 12 स्वीकृत पदों के विरुद्ध रैंक के 16 अधिकारी वर्तमान में सेवाएं दे रहे हैं। कुछ प्रमुख सचिव या तो कम महत्व के पदों पर कार्यरत हैं या निचले पदों पर तैनात हैं। खेमका ने पत्र में लिखा है कि जब तक आईपीएस अधिकारी अपने कैडर में अधिशेष है, उसे अपने कैडर पद पर सेवा करनी चाहिए।
आईएएस अधिकारी के लिए तय प्रधान सचिव पद पर आईपीएस को नियुक्त करना कानूनी तरीके से भी सही नहीं है। ये आदेश भविष्य में गलत मिसाल कायम करेंगे। इसका हवाला देकर भविष्य में भी सरकारें आईएएस कैडर के पदों पर आईपीएस की नियुक्तियां करती रहेंगी, जो अखिल भारतीय सेवा की संस्था को नष्ट करने के लिए काफी होगा। खेमका ने पत्र के अंत में लिखा है कि उन्हें विश्वास है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री, सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा अनुच्छेद 312 के तहत बनाई गई अखिल भारतीय सेवाओं की संवैधानिक संस्था की रक्षा करेंगे।