हरियाणा के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अशोक खेमका को राज्य विजिलेंस ब्यूरो ने 10 हजार क्विंटल मूंग बीज खरीद के मामले में क्लीन चिट तो दे दी, लेकिन खेमका इतने से खुश नहीं हैं। उनका कहना है कि विजिलेंस ब्यूरो अपनी जांच रिपोर्ट भी सार्वजनिक करे ताकि वे चेहरे भी उजागर हो सकें, जिन्होंने उन्हें झूठे मामले में फंसाने का षड्यंत्र रचा था।
शनिवार को एक ट्वीट में अशोक खेमका ने लिखा, 31 महीने बाद झूठी सतर्कता मामले में क्लीन चिट। जांच रिपोर्ट नहीं दी गई। कारण, झूठे आरोपों में फंसाने वाले षड्यंत्रकारियों को बचाना? स्टेट विजिलेंस ब्यूरो ने वर्ष 2013 में अशोक खेमका के खिलाफ मूंग बीज खरीद में अनियमितता बरते जाने का मामला दर्ज किया था।
यह मामला पानीपत के जगबीर सिंह की शिकायत पर दर्ज किया गया था, जिसने शिकायत में कहा था कि मूंग बीज का सप्लाई आर्डर देते समय नियमों की अनदेखी की गई, जबकि खेमका सरकार को यह विश्वास दिलाते रहे कि मूंग बीज की खरीद विभाग की ओर से तय दाम 8400 रुपये क्विंटल से भी कम 8100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदे गए हैं।
इससे विभाग को 30 लाख रुपये का फायदा हुआ है, लेकिन राबर्ट वाड्रा लैंड डील उजागर कर चुके अशोक खेमका से नाराज तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने अशोक खेमका की एक नहीं सुनी और जांच बैठा दी गई। अब जांच खत्म होने के बाद विलिलेंस ब्यूरो ने खेमका से यह भी कहा है कि वे अपनी एसीआर ठीक कराने के लिए प्रतिवेदन दे सकते हैं।