केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री द्वारा की गई टिप्पणी से भड़कीं आशा वर्कर ने कुरुक्षेत्र में रोष प्रदर्शन करते हुए पुतला फूंका। आशा वर्कर्स यूनियन की जिलाध्यक्षा रानी देवी व सचिव मनजीत ने कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने 12 अगस्त को संसद में एक सवाल के जवाब में कहा कि आशा वर्कर स्वयंसेवी है और वे अपनी मर्जी से काम कर रही हैं, वें चाहें तो काम छोड़ सकती है, सरकार न तो इनकी सेवा शर्तें तय करना चाहती है और न ही न्यूनतम वेतन देना चाहती है।
इस बयान का विरोध करते हुए रोष प्रदर्शन कर आशा वर्कर ने शनिवार को नए बस स्टैंड के निकट उनका पुतला फूंका। सीटू के अध्यक्ष भीम सिंह और सचिव महावीर दहिया भी प्रदर्शन में शामिल रहे।
उन्होंने कहा कि आशा वर्कर मामूली प्रोत्साहन राशि पर सालों से काम कर रही हैं। पक्के रोजगार और न्यूनतम वेतन की सालों से मांग की जा रही है।
उन्होंने कहा कि 45वें श्रम सम्मेलन में सर्व सम्मति से निर्णय हुआ कि परियोजना वर्कर्स, जिसमें आशा, मिड-डे मील, आंगनबाड़ी के साथ और भी कई तरह के वर्कस हैं, की सेवा शर्तें तय की जाएं तथा उन्हें न्यूनतम वेतन दिया जाए।
तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने उस समय कहा था कि 45 वें श्रम सम्मेलन के फैसलों को जल्द ही लागू करेंगे।
लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। वर्तमान स्वास्थ्य मंत्री ने तो श्रम सम्मेलन की सिफारिशों को ही खारिज कर दिया है। सरकार एवं स्वास्थ्य मंत्री का यह रुख महिलाओं व श्रमिक विरोधी होने के साथ-साथ तानाशाही है।
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने अच्छे दिनों का वायदा किया था, लेकिन अब उनकी हकीकत सामने आ रही है। प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय मंत्री से अपना बयान वापस लेने और सम्मेलन की सिफारिशों को तुरंत लागू करने की मांग की। प्रदर्शन में पिंकी, रजनी, ममता, रेनू, सुदेश, निर्मला सहित अन्य आशा वर्कर शामिल रही।