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मालवा में जहरीले भूजल का कारण थर्मल प्लांट की राख!

Fri, 25 Apr 2014 10:36 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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थर्मल प्लांट से निकलने वाली राख ही कहीं पंजाब के मालवा क्षेत्र के भूजल में पाए जाने वाले घातक पदार्थों का कारण तो नहीं है।
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बंगलूरू आईआईएस ने यह जानकारी शुक्रवार को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट को अपनी अंतरिम रिपोर्ट के माध्यम से दी। जांच के लिए बंगलुरू के इंडियन इंस्टीटयूट आफ साइंसेज (आईआईएस) ने बठिंडा और रोपड़ के थर्मल प्लांट से निकलने वाली राख के नमूने लिए हैं।

आईआईएस ने कोर्ट में जानकारी दी है कि इन नमूनों का अभी अध्ययन किया जा रहा है। संस्थान ने कोर्ट ने मांग की है कि इन नमूनों की जांच के लिए कुछ और समय दिया जाए।
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इस पर चीफ जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस अरुण पल्ली की खंडपीठ ने आईआईएस को चार माह का समय दिया है। आईआईएस को इस मामले की अगली सुनवाई से तीन दिन पहले नमूनों का अध्ययन कर इसकी अंतिम रिपोर्ट हाईकोर्ट की रजिस्ट्री में दायर करनी होगी।
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पिछली सुनवाई के दौरान पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने शपथ पत्र दायर किया था कि इस मामले की जांच के लिए गठित कमेटी की बैठक हुई थी। इसमें आईआईएस के वैज्ञानिक डा. शेखर भी थे। उन्हें इस मामले में सभी विभागों द्वारा अब तक की शोध की जानकारी दे दी गई है। डा. शेखर ने बताया की थर्मल प्लांट्स से निकलने वाली राख के अध्यन में मानसून से पहले और बाद के भूमिगत जल की जांच किए जाने की जरुरत है। जिससे पता चलेगा कि इस राख से भूमिगत जल कितना प्रभावित हो रहा। इसके लिए चार महीने का समय चाहिए। खंडपीठ ने इस मामले में चार महीनो में अध्ययन कर अंतरिम रिपोर्ट हाईकोर्ट को सोंपने के आदेश दे दिए हैं। पंजाब सरकार इस मामले में हाईकोर्ट को बता चुकी है कि मालवा क्षेत्र में जहां भी यूरेनियम पाया गया है। उस क्षेत्र में आर ओ प्लांट लगाए गए हैं। जिससे लोगों को शुद्ध जल मिल सके।
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