चंडीगढ़। सर्दी का प्रकोप काफी बढ़ गई है। इस मौसम में लोग घरों निकलने से डरते हैं। आशंका रहती है कि कहीं ठंड न लग जाए। ऐसे में आसन और प्राणायाम ठंड से राहत दिलाएगा। यह कहना है योग गुरु एमएन शुक्ला का। उन्होंने कहा कि कुछ चुने हुए आसन उचित ढंग से किए जाएं तो आप सर्दियों का सामना आसानी से कर सकते हैं। इसमें लुढकन सर्पासन, सूर्य नमस्कार के अलावा भस्त्रिका प्राणायाम शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि योग और प्राणायाम के लिए किसी योग्य शिक्षक से जानकारी लेना और अभ्यास करना जरूरी है। सूर्य नमस्कार की कुल 12 स्थितियां होती हैं जिनमें प्रणामासन, हस्तोत्थानासन, पादहस्तासन, अश्वसंचालन आसन, पर्वतासन, अष्टांग प्रणामासन और भुजंगासन किए जाते हैं तथा अन्य पांच दोहराए जाते हैं। सूर्य नमस्कार को सभी आयु वर्ग के बच्चे, युवा तथा बुजुर्ग भी यथाशक्ति कर सकते हैं।
लुढ़कन सर्पासन से पेट का मोटापा दूर होता है
लुढ़कन सर्पासन से सर्वप्रथम शरीर में गर्मी आती है, पेट का मोटापा समाप्त होता है, पाचन अंगों की मालिश होती है। पेट संबंधी सभी विकार दूर हो जाते हैं। लुढकन सर्पासन में पेट के बल आसन पर लेट जाएं। एड़ी पंजे मिला लें। दोनों बाजू पीठ के पीछे ले जाएं और हथेलियां मिला लें। उंगलियों में उंगलियां फंसा लें। बाजुओं को खींचकर सीधा कर लें ताकि अंगूठे रीढ़ के अंतिम छोर पर रहें। अब श्वास भरकर आगे से धड़ उठाएं तथा पीछे से बिना घुटने मुड़े हुए पैरों को उठाएं। नाभि क्षेत्र आसन पर रहे। अब भरी हुई श्वास में दाएं बाएं पेट पर लुढ़कना शुरू करें।
ध्यान रहे आपके कंधे और घुटने नीचे आसन पर ना टकराएं। जब श्वास भरने की आवश्यकता महसूस हो तो दाहिने कंधे पर कुछ पल रुकें। फिर श्वास भरें और क्रिया को दोहराएं। इस क्रिया को आप चार-पांच स्वांस तक दोहराते रहें। इसके अलावा हृदय रोगी, अस्थमा के रोगी, पेट के अल्सर के रोगी तथा गर्भकाल में महिलाएं इस आसन को न करें।
भस्त्रिका प्राणायाम से दूर होते हैं वात, पित्त, कफ के दोष
भस्त्रिका प्राणायाम के माध्यम से बड़े वेग के साथ शक्ति लगाते हुए श्वास भरा जाता है और श्वास शक्ति लगाते हुए छोड़ा जाता है, लोहार की धौंकनी की तरह। इस प्राणायाम को सर्दियों में किया जाता है। हृदय रोगी, अल्सर के रोगी, हर्निया के रोगी, उच्च रक्तचाप के रोगी इस प्राणायाम को न करें। पद्मासन, अर्ध पद्मासन या सुखासन में बैठें। इस प्राणायाम को चार अवस्थाओं में किया जाता है। सर्दियों के मौसम के लिए यह प्राणायाम बहुत ही लाभप्रद है। वात, पित्त, कफ के दोष दूर होते हैं। रक्त शोधन होता है। रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है। शरीर में गर्माहट महसूस होती है।