चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी के छात्रावासों में शोधार्थियों की संख्या बढ़ते ही पीयू प्रशासन की भी चिंता बढ़ गई है। वार्डनों को निर्देश दिए गए हैं कि अब चुनौती कोरोना गाइड लाइन के पालना की होगी। कोई विद्यार्थी न गले मिले और न हाथ मिलाएं, इस पर ध्यान दें। मास्क का शतप्रतिशत प्रयोग करवाएं। बाहरी छात्रों को किसी भी कीमत पर न आने दें। इसके अलावा भी कई निर्देश दिए हैं। वहीं छात्रावासों में वार्डन विद्यार्थियों की कमेटियां बनवा रहे हैं ताकि नियमों का पालन हो सके और कोरोना से शोधार्थी सुरक्षित रह सकें।
इन नियमों का करना होगा पालन
पीयू में 20 छात्रावास हैं। अधिकांश छात्रावासों में शोधार्थी रह रहे हैं। पहले पीयू ने तीन साल से रिसर्च कर रहे शोधार्थियों को कैंपस आने का न्यौता दिया था और बाद में दो साल से रिसर्च कर रहे शोधार्थियों को कैंपस बुला लिया गया। पहले तो इनकी संख्या कम थी, लेकिन बाद में धीरे-धीरे बढ़ती गई। अब संख्या हर हॉस्टल में 40 से लेकर 80 तक पहुंच रही है। हालांकि कुछ विद्यार्थी रात को छात्रावासों में नहीं रुक रहे हैं। इन विद्यार्थियों की संख्या छात्रावासों में बढ़ी तो पीयू प्रशासन ने इसकी चिंता करते हुए निर्देश दिए हैं। वार्डन से कहा गया है कि एसओपी का पूरा पालन करवाया जाए। रात को विद्यार्थियों को न बाहर जाने दें और न बाहरी विद्यार्थियों को आने दें। बार-बार विद्यार्थी सैनिटाइजर का प्रयोग करें।
विद्यार्थी सार्वजनिक रूप से बैठक न करें.. खुले में न थूकें
विद्यार्थी सार्वजनिक रूप से बिना अनुमति के बैठक न करें। साथ ही यह भी सुनिश्चित करें कि शोधार्थियों ने छात्रावासों में अपने परिवारवालों के नंबर दिए हैं या नहीं। फोन नंबर बताना जरूरी है। साथ ही जो शोधार्थी नए आ रहे हैं उनसे कोविड जांच प्रमाण पत्र देखें और किसी विद्यार्थी में कोरोना के लक्षण मिलते हैं तो उसकी सूचना उच्चाधिकारियों को दें। पीयू प्रशासन का मकसद है कि शोधार्थी सुरक्षित रहें। यदि किसी हॉस्टल में एक भी विद्यार्थी को कोरोना हुआ तो फिर स्थिति संभले से भी नहीं संभलेगी। खाने को लेकर भी निर्देश दिए हैं। कहा है कि विद्यार्थी मेस आदि में न बैठें। अपना खाना पैक करवाकर कमरे में लाकर खाएं। शोधार्थियों से भी अपील की है कि वह पीयू प्रशासन का साथ दें ताकि सभी लोग सुरक्षित रह सकें।