संगरूर जिले में धूरी हलके के कांग्रेस विधायक अरविंद खन्ना ने बुधवार दोपहर इस्तीफा दे दिया। विधानसभा स्पीकर को इस्तीफा सौंपने के बाद उन्होंने अपने फेसबुक पेज पर इसका खुलासा किया।
इसमें उन्होंने अकाली दल में जाने की चर्चाओं का खंडन किया। साथ ही कहा कि वह परिवार और कारोबार के चलते सियासत से दूर जा रहे हैं। खन्ना को कैप्टन अमरिंदर सिंह का करीबी माना जाता रहा है। उन्होंने प्रदेश कांग्रेस कमेटी को इस्तीफे की औपचारकि सूचना नहीं दी है। पर अपने संदेश में लिखा है कि उन्होंने कांग्रेस उपाध्यक्ष को अपनी स्थिति बता दी है।
फेसबुक पेज पर दिए भावुक संदेश
खन्ना ने अपने फेसबुक पेज पर दिए भावुक संदेश में लिखा है कि पिछले दो महीनों के दौरान बहुत से लोगों ने उन्हें अकाली दल में जाने केबारे में पूछा। तो पिछले कुछ हफ्तों में चुनाव प्रचार से गैर हाजिर रहने के बारे में सवाल किए। पर उन्होंने अधिकारिक तौर पर कुछ नहीं किया। सच यह है कि उन्होंने अकाली दल में जाने पर विचार किया था। पर निजी फायदे के लिए नहीं। इसलिए कि हलके में काम कराए जा सकें, पंजाब के विकास में योगदान दे सकें, तरक्की हासिल करने में युवाओं की मदद की जा सके।
खन्ना ने लिखा है कि उन्होंने अपनी जिंदगी केबारे में सोचा कि क्या वह अपने परिवार के साथ न्याय कर रहे हैं, उन्हें समय दे पा रहे हैं। खन्ना ने लिखा है कि उनके कारोबार और काम करने वाली टीमों को भी उनके समय की जरूरत है।
उन्होंने धूरी और संगरूर में लोगों के सहयोग के लिए आभार जताया। साथ ही कहा कि दुखी दिल से उन्हें सियासत से दूर जाने का फैसला लेना पड़ रहा है। पर एनजीओ उम्मीद के जरिए पंजाब में वह समाजसेवा जारी रखेंगे। युवाओं को खुशहाल बनाने में उन्होंने लोगों का सहयोग मांगा। साथ ही कहा कि वह पंजाब आते रहेंगे और फेसबुक पर संपर्क में रहेंगे।
कैप्टन के चुनाव से दूर रहे खन्ना
अरविंद खन्ना को कैप्टन अमरिंदर सिंह का करीबी माना जाता रहा है। 2012 केविधानसभा चुनाव के समय तो कैप्टन खेमे में सिर्फ अरविंद खन्ना की ही चलती थी। पर सूत्र बताते हैं कि इस चुनाव में समीकरण कुछ बदल गए थे। कैप्टन गुट में एक तरफ बीआईएस चाहल की वापसी हुई थी।
दूसरी तरफ राणा गुरजीत ने सारी कमान संभाल ली थी। अरविंद खन्ना इस चुनाव में एक दिन भी कैप्टन के चुनाव प्रचार केलिए अमृतसर नहीं गए थे। कैप्टन के रोड शो में जब सारे पंजाब केनेता पहुंचे थे, तब भी खन्ना नहीं गए थे। हालांकि खन्ना ने अपने फेसबुक संदेश में लिखा है कि उन्हें इस्तीफे का फैसला कैप्टन अमरिंदर के उम्मीदवार बनने के बाद टालना पड़ा। वह नहीं चाहते थे कि जब कैप्टन चुनाव में व्यस्त हों तो वह कोई कदम उठाएं। यह भी आशंका थी कि इसका गलत प्रभाव उनकेचुनाव पर न पड़े।