रैली करने आए आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरविंद केजरीवाल ने एसवाईएल के गंभीर मामले पर चुप्पी साधे रखी। उन्होंने बादल और कैप्टन परिवार पर सांझ का आरोप लगाते हुए कई बातें कहीं, लेकिन एसवाईएल पर नहीं बोले।
बठिंडा जिले के गांव कोटशमीर में सोमवार को एक रैली को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने कहा कि 2002 में मुख्यमंत्री बनने से पहले पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह की माली हालत इस कदर कमजोर थी कि वह अपनी रिहाइश को रंग रोगन भी नहीं करवा सकते थे, लेकिन मुख्यमंत्री बनने के बाद तीन सालों में उन्होंने काली कमाई से इतनी दौलत एकत्र कर ली कि उसको संभालने के लिए उन्हें विदेशी बैंकों में अपने खाते खुलवाने पडे़।
उन्होंने बताया कि कैप्टन अमरिंदर सिंह ने 26 जुलाई 2005 को अपनी पत्नी परनीत कौर के नाम और बेटे रणइंदर सिंह के खाते खुलवाए। इसके अलावा एक अपने बेटे के नाम वाले ट्रस्ट का खाता भी खुलवाया।
मजीठिया को ड्रग रैकेट में बचाने का आरोप लगाया
बठिंडा में अरविंद केजरीवाल की रैली
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि बादल कैप्टन परिवारों की सांझ से ही बिक्रम सिंह मजीठिया को छह हजार करोड़ के ड्रग रैकेट से बचाया गया है। इस बारे में कैप्टन के जरिये सोनिया गांधी को सहमत किया, वहीं बादल सरकार ने न सिर्फ कैप्टन के खिलाफ दर्ज मामले वापस लिए, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी से कैप्टन को विदेशी खातों संबंधी बचाया गया।
84 दंगों को चुनाव में मुख्य मुद्दा बनाते केजरीवाल ने कहा कि 49 दिनों की सरकार ने इस कांड के लिए एसआईटी का गठन किया था, लेकिन जब सरकार बनी तो मोदी सरकार ने उनकी ओर से बनाई गई एसआईटी को खारिज कर दिया। केजरीवाल ने कहा कि सिख दंगों के आरोपियों को सख्त सजाएं मिल चुकी होती तो 2002 में गुजरात अंदर मुस्लिम दंगा न होता।
उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार की समाप्ति के लिए ही वह राजनीति में आए हैं और अपनी सरकार के तीन मंत्रियों को इसलिए बर्खास्त कर दिया, क्योंकि उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप थे।