चंडीगढ़। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का चलन पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ रहा है। वायु सेना भी इसे व्यापक स्तर पर अपना रही है। वीरवार को चंडीगढ़ स्थित थ्री बेस रिपेयर डिपो (बीआरडी) में एयर-ऑफिसर-कमांडिंग, एयर कमोडोर राजीव श्रीवास्तव ने बताया कि एमआई-17 इंजन के स्वास्थ्य की निगरानी के लिए एआई टूल विकसित किया जा रहा है। इसके लिए पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज के साथ समझौता हुआ है।राजीव श्रीवास्तव ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को थ्री बीआरडी काफी बड़े स्तर पर अपना रहा है। इस पर प्रोजेक्ट शुरू हो चुके हैं। बहुत ही जल्द नतीजे भी आने शुरू हो जाएंगे। थ्री बीआरडी के योजना प्रमुख ग्रुप कैप्टन आनंद जे कर्वे ने बताया कि थ्री बीआरडी ने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज, आईआईटी मंडी समेत कई संस्थाओं के साथ मिलकर कई प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। पेक के साथ एआई का एक खास प्रोजेक्ट चल रहा है। इसका सप्लाई ऑर्डर दिया जा चुका है। एआई टूल के माध्यम से एमआई-17 इंजन की स्वास्थ्य निगरानी का प्रोजेक्ट चल रहा है। यह कुल नौ महीने का है, जिसका पहला चरण पूरा हो चुका है। ये प्रोजेक्टर चार चरणों में पूरा होगा। इस टूल से इंजन के स्वास्थ्य की जानकारी मिलेगी और उसे क्या निवारक रखरखाव चाहिए, इसकी पहले ही काफी अच्छी और सटीक जानकारी मिल सकेगी। इससे इंजन का स्वास्थ्य भी बेहतर रहेगा।
राजीव श्रीवास्तव बोले- एक होकर आत्मनिर्भर भारत के लिए काम करना होगा
राजीव श्रीवास्तव ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के तहत जो प्रण लिया गया है, उसे डिफेंस प्रोडक्शन और बीआरडी अकेले मिलकर पूरी नहीं कर सकते। इसके लिए पूरे देश के विभिन्न संस्थाओं की जरूरत पड़ेगी। इसलिए निजी कंपनियों को भी आमंत्रित किया जा रहा है। पूरे देश की संस्थाओं को एक होकर आत्मनिर्भर भारत के लिए काम करना होगा। थ्री बीआरडी उन सभी आईआईटी से संपर्क कर रहा है, जहां उन्हें लग रहा है कि उनके काम के अनुसार का रिसर्च चल रही है। इसके अलावा समय के साथ कई निजी एजेंसियों ने भी काफी अच्छा रिसर्च और डेवलपमेंट का काम किया है। उनके साथ भी काम किया जा रहा है। निजी एजेंसियों में मॉडिफिकेशन के लिए अल्फा डिजाइन टेक्नोलॉजीज लिमिटेड, मैक्स एयरोस्पेस, अडानी ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज, रिलायंस डिफेंस आदि हैं।
61 वर्ष में 4025 एयरो इंजन की ओवरहालिंग
थ्री बीआरडी की स्थापना 1 फरवरी 1962 को हुई थी। इस डिपो की आधारशिला तत्कालीन रक्षा मंत्री वीके कृष्ण मेनन द्वारा रखी गई थी और इसके पहले स्टेशन कमांडर जीपी कैप्टन एमजे कृपलानी एमबीई थे। डिपो को भारतीय वायु सेना का एकमात्र मरम्मत डिपो होने का अनूठा गौरव प्राप्त है। यह विमान और एयरो इंजनों की ओवरहालिंग के साथ-साथ एक उपकरण डिपो के रूप में कार्य करता है। 1962 में स्थापना के बाद से एएन-12, आईएल-14, एमआई-4, एमआई-8, एमआई- 17, एमआई-17 आईवी, एमआई-17वी5 सहित डिपो ने 1038 विमानों और पिछले 61 वर्षों में 4025 एयरो इंजन की ओवरहालिंग की है। डिपो को 2013 में प्रेसिडेंट्स कलर से सम्मानित किया गया था।