हरियाणा को कोरोना संक्रमित संवेदनशीन जिलों से भी अध्यापक यहां पहुंचे थे। इस दौरान अध्यापकों समेत सांसद भी सोशल डिस्टेंसिंग को भूल गए। मंच पर पास-पास ही लोग खड़े थे और कुछ ने मास्क भी नहीं लगाया था, जबकि मास्क लगाना अनिवार्य है। इतना ही नहीं उनसे मिलने आए कई पीटीआई अध्यापकों ने भी मुंह को नहीं ढक रखा था।
जिले में कैसे पहुंचे 2000 लोग
जब लॉकडाउन के चलते भीड़ पर प्रतिबंध है, विवाह के लिए सिर्फ 50 लोग और अंतिम संस्कार के लिए 20 लोगों को अनुमति दी जा रही है तो इतनी बड़ी संख्या में पीटीआई अध्यापक कैसे पहुंच गए। इतनी बड़ी संख्यां में भीड़ इकट्ठा होने से जिला प्रशासन पर भी उंगली उठ रही है। अध्यापकों को पानीपत बार्डर पर ही क्यों नहीं रोका गया।
शाम चार बजे तक मंडी में लगा रहा जमावड़ा
जमवाड़ा शाम 4 बजे तक ग्रांउड में फड़ के नीचे लगा रहा। वहीं सांसद संजय भाटिया दोपहर करीब ढाई बजे पहुंचे। करीब एक घंटे तक सांसद व टीचरों का आपस में संबोधन चला। इस दौरान भीड़ बहुत ही ज्यादा हो चुकी थी। गर्मी के चलते लोग फड़ से बाहर नहीं निकल पाए ।
पीले कुर्ते में सांसद संजय भाटिया।
वर्ष 2010 में तत्कालीन कांग्रेस पार्टी की सरकार की ओर से 1983 पीटीआई अध्यापकों की भर्ती की गई थी। इस भर्ती प्रक्रिया को सर्वोच्च न्यायालय ने गलत मानते हुए निरस्त करने का फैसला दिया था। जिससे उस समय इन अध्यापकों की नियुक्ति को रद्द कर दिया गया। जिससे आक्रोशित अध्यापकों ने सांसद से मिलने का मन बनाया और लॉकडाउन के चलते सांसद से अनुमति लेकर पानीपत पहुंच गए।
अध्यापकों ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर वे रिव्यू पिटीशन डालना चाहते हैं और उनको सरकार से मदद चाहिए। जिस पर सांसद ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का आदेश है, उसे मनाना ही होगा, उसमें कुछ नहीं किया सकता है। हालांकि हर संभव मदद की कोशिश की जाएगी।
पीटीआई अध्यापक बोले- नौकरी जाने से सड़क पर आए
प्रदेश भर से आए हटाए गए पीटीआई अध्यापकों ने अपने आर्थिक व मानसिक हालात को सांसद के सामने आंसुओं में बयां किया। उन्होंने कहा कि नौकरी से निकाले जाने के बाद वे सड़क पर आ गए हैं। किसी की उम्र ज्यादा हो गई तो किसी की आंखें कमजोर हो गई है। अब तक एक अध्यापक की जान भी जा चुकी है। वहीं महिला अध्यापकों ने भी अपने पारिवारिक, आर्थिक संकट की कहानी बयां की।
लॉकडाउन में इन अध्यापकों के पानीपत में इकट्ठा होने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई वैसे-वैसे अध्यापकों समेत सांसद की फजीहत उड़ती नजर आई। जनता से सांसद व अध्यापकों के बारे में ये तक लिखा कि ये अब कोरोना फैलाने का काम करेंगे। जो इस विकट परिस्थिति में भी जनसभा को संबोधित करने पहुंच गए हैं।
पहले मैने मना किया, हठ की तो सहमति दी, मंच से बोले सांसद
सांसद संजय भाटिया ने मंच पर चढ़ते ही सबसे पहले लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग की बात की और फिर यह भी कह गए कि मैंने तो मना किया था आप ही नहीं मानें। उन्होंने मंच से कहा कि मैंने मना किया था कि लॉकडाउन चल रहा है, ज्यादा आदमी इकट्ठे होंगे तो सोशल डिस्टेंसिंग नहीं होगी और दो गज की दूरी भी नहीं बन पाएगी। इसे बाद भी आप नहीं माने तो मैंने कहा ठीक है।
लॉकडाउन की धज्जियां उड़ी, लेकिन सांसद, उपायुक्त ने साधी चुप्पी
कोरोना संक्रमण के कॉल में लॉकडाउन की धज्जियां उड़ गईं। जिसका पालन करने की जिम्मेदारी भी सरकार और प्रशासन की है। इस बारे में सांसद संजय भाटिया और उपायुक्त धर्मेंद्र सिंह का पक्ष जानने के लिए कई बार कॉल किया गया और मैसेज छोड़ा गया लेकिन उन्होंने अपना पक्ष नहीं दिया। चुप्पी बनाए रखी।