आपके लाडले का भविष्य किस फील्ड में बेहतर बनेगा, यह एप्टीट्यूड टेस्ट के जरिये पता चलेगा। इस टेस्ट का आयोजन भारत सरकार, नेशनल एसोसिएशन ऑफ साइकोलॉजिक साइंस, पंजाब यूनिवर्सिटी का मनोविज्ञान विभाग व प्रसार भारती की ओर से किया जा रहा है। इस टेस्ट में चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा व हिमाचल प्रदेश के कक्षा छह से 12वीं तक के लाखों बच्चे हिस्सा लेंगे।
सरकार का उद्देश्य केवल टेस्ट तक ही सीमित नहीं है, जो बच्चे की पसंद होगी उसे उसी फील्ड के लिए भी प्रशिक्षित किया जाएगा। यह प्रस्ताव केंद्र सरकार की संस्था प्रज्ञा भारत ने तैयार किया था, जिसे सरकार ने स्वीकार कर लिया है। यह कार्यक्रम प्रसार भारती और एक एनजीओ की ओर से सहयोग किया जाएगा।
पीयू का मनोविज्ञान विभाग भी इस पूरे टेस्ट के आयोजन में हिस्सा लेगा और बच्चों को जानकारियां उपलब्ध कराएगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि कई अभिभावक बच्चे की पसंदीदा फील्ड या पसंद के बारे में नहीं जान पाते और वह उन्हें डॉक्टर व इंजीनियर बनने के लिए कहते हैं। ऐसे में वह उस फील्ड में पूरी तरह कारगर नहीं हो पाते। इसी को ध्यान में रखते हुए छात्रों का एप्टीट्यूड टेस्ट करवाया जा रहा है।