चंडीगढ़। चंडीगढ़ में प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग का तीन वर्षीय डिप्लोमा में प्रवेश के लिए अंतिम तिथि 31 अगस्त है। आवेदन फार्म और प्रोस्पेक्टस सेक्टर-16 स्थित गांधी स्मारक भवन से प्राप्त किए जा सकते हैं। डिप्लोमा इन नैचुरोपैथी एवं योग थेरेपी में प्रवेश के लिए बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। एमबीबीएस, बीएएमएस, बीयूएमएस, बीएचएमएस डिग्री कोर्स वाले व्यक्तियों को सीधे दूसरे वर्ष में प्रवेश मिलता है। शुल्क साढ़े छह हजार रुपये वार्षिक है।
गांधी स्मारक भवन सेक्टर-16 के डायरेक्टर डॉ. देवराज त्यागी ने बताया कि काफी समय से चिकित्सा के क्षेत्र में एलोपैथी का प्रयोग हो रहा है लेकिन इसके साइड इफेक्ट और बढ़ी हुई कीमतों के कारण लोगों का रुझान अब आयुर्वेदिक व प्राकृतिक चिकित्सा की ओर बढ़ रहा है। प्राकृतिक चिकित्सक बनने के इच्छुक युवाओं के लिए प्राकृतिक चिकित्सा में करिअर की अच्छी संभावनाएं हैं।
डॉ. त्यागी ने बताया कि प्राकृतिक चिकित्सा एक उभरती हुई आदर्श तथा निर्दोष चिकित्सा पद्धति है। इससे नियमित जीवन शैली के साथ संतुलित आहार, योग, प्राणायाम और पंच महाभूतों का उपयोग करते हुए शरीर को रोग रहित बनाया जाता है। प्राकृतिक चिकित्सा में किसी दवाई का प्रयोग नहीं होता है। प्राकृतिक चिकित्सा सिखाती है कि निरोग कैसे रहा जाए। डिप्लोमा इन नैचुरोपैथी एंड योग थेरेपी (एनडीडीवाई ) पाठ्यक्रम तीन वर्ष का है। इसमें छह माह का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी शामिल है। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में करिअर बनाने के लिए मुख्य रूप से डिप्लोमा इन नैचुरोपैथी एंड योग थेरेपी (एनडीडीवाई) का कोर्स उपलब्ध है। गांधी नेशनल एकेडमी आफ नैचुरोपैथी, राजघाट नई दिल्ली से यह कोर्स संचालित किया जाता है।