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Chandigarh News: चंडीगढ़ की अपूर्वा ने दीक्षांत में दो मेडल हासिल कर बढ़ाया मान

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चंडीगढ़। मेरे घर में कोई भी डॉक्टर नहीं है। मैं परिवार में पहली डॉक्टर हूं। बचपन से ही दूसरों की मदद करने की सोचती थी। शायद यही कारण है जो मैंने डॉक्टरी चुनी। मेरा मानना हे कि डॉक्टर बनने के लिए दिन-रात किताबों में डूबे रहना जरूरी नहीं है। अगर नियमित रूप से चार से पांच घंटे डेली पढ़ाई की जाए तो काफी है। लेकिन पढ़ाई में ब्रेक नहीं आना चाहिए। यह कहना है चंडीगढ़ की डॉ. अपूर्वा शर्मा का जिन्होंने पीजीआई के 37वें दीक्षांत में दो मेडल प्राप्त कर शहर का मान बढ़ाया।
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डॉ. अपूर्वा की मां नीरजा शर्मा पीयू में अर्थशास्त्र की प्रोफेसर हैं। वहीं, पिता राजकुमार शर्मा सेवानिवृत्त हाे चुके हैं। डॉ. अर्पूवा को डर्मेटोलॉजी में गोल्ड और सिल्वर मेडल प्रदान किया गया है। इनके 40 से ज्यादा प्रकाशन हैं। इसके अलावा पेंटिंग, गाना गाना और किताबें पढ़ना पसंद है।
दोनों दोस्तों ने एक साथ पाया गोल्ड मेडल
पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी में पीजीआई से डीएम करने के बाद प्रैक्टिस कर रहे डॉ. बाल मुरुगन और डॉ. अनंत नारायण ने एक साथ गोल्ड मेडल प्राप्त किया। ये दोनों बेस्ट फ्रेंड हैं और इन दोनों के घर से भी ये पहले डॉक्टर ही हैं। इनका कहना है कि पीजीआई जैसे संस्थान में पढ़ाई के घंटे गिनने का समय नहीं मिलता। यहां एडमिशन लेने के बाद कोर्स पूरा करने तक सिर्फ मरीज और किताबों के बीच ही रहना होता है। ऐसा एक बेहतर डॉक्टर के लिए जरूरी भी है। लेकिन इसके बीच खुद के शौक के लिए भी समय निकालना जरूरी है जिससे जिंदगी बोरिंग और तनाव देने वाली न लगे। डॉ. मुरुगन ने बच्चों में होने वाले जेनेटिक वेस्ट सिंड्रोम और डॉ. अनंत ने बच्चों में आईसीयू विकनेस पर शोध किया है।
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इनको मिला गोल्ड मेडल
कटारिया मेमोरियल स्वर्ण पदक - डॉ. पीयूष अग्रवाल, डॉ. अपूर्वा शर्मा
मेजर जनरल अमीर चंद स्वर्ण पदक- डॉ. हरप्रीत कौर, डॉ. गौरव ज्याणी, डॉ. वेंकटासुब्रमण्यम के, डॉ. कुणाल रमेश चांदेकर, डॉ. बालमुरुगन एन
बायोमेडिकल साइंसेज के क्षेत्र में प्रो आर नाथ स्वर्ण पदक- डॉ. अनंत नारायण के, डॉ. पुष्पराज अवस्थी, डॉ. दिविका सपेहिया
बायोमेडिकल विज्ञान के क्षेत्र में प्रो. डी. सुब्रमण्यम स्वर्ण पदक- डॉ. नमिता आर. कुमार, डॉ. स्वयंजीत शतपति, डॉ. खुशप्रीत कौरप्रो वाईएस वर्मा स्वर्ण पदक
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एनेस्थीसिया के क्षेत्र में- डॉ. चेतन हेब्बर के
वी.के. सैनी स्वर्ण पदक हृदय रोग के क्षेत्र में- डॉ. प्रतिभा शर्मा
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