पंजाब के बठिंडा के सिविल अस्पताल स्थित ब्लड बैंक कर्मियों की लापरवाही से बच्चों के एचआईवी संक्रमित होने का सिलसिला थम नहीं रहा। थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को जारी किए जाने वाले रक्त से मंगलवार को एक और बच्चा एचआईवी संक्रमित पाया गया। इससे पहले सात नवंबर को बच्चा एचआईवी संक्रमित पाया गया था।
इस मामले की जांच कर रही कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में ब्लड बैंक के चार कर्मियों के खिलाफ पुलिस जांच की मांग कर सेहत विभाग के सचिव को रिपोर्ट भेजी है। वहीं सिविल सर्जन डॉ. अमरीक सिंह संधू और एसएमओ डॉक्टर मनिंदरपाल सिंह ने मामले पर चुप्पी साधी हुई है।
बठिंडा के थाना कैंट के अधीन आते गांव के थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे को उसके परिजनों ने सात नवंबर को ब्लड बैंक से रक्त लेकर चढ़वाया था। टेस्ट करने पर बच्चा एचआईवी संक्रमित आया था। बच्चे के परिजनों ने सिविल अस्पताल के एसएमओ डॉ. मनिंदरपाल सिंह और डीसी बी श्रीनिवासन को लिखित शिकायत देकर ब्लड बैंक कर्मियों पर कार्रवाई की मांग की थी।
शिकायत पर एसएमओ ने तीन डॉक्टरों की कमेटी जांच के लिए गठित कर दी थी। जांच में खुलासा हुआ कि सात नवंबर को बच्चे को जो ब्लड चढ़ाया गया था वह एचआईवी संक्रमित युवक का था। उस युवक को बुलाकर सोमवार को टेस्ट किया गया था तो उसके एचआईवी संक्रमित होने की पुष्टि हुई थी। जांच कमेटी ने इस मामले में चार लोगों को आरोपी मानते हुए सेहत विभाग के सचिव को अपनी रिपोर्ट भेजकर मांग की है कि पूरे मामले की पुलिस जांच करवाई जाए।
वहीं मंगलवार को थाना तलवंडी साबो के अधीन आते गांव का 12 वर्षीय बच्चा एचआईवी संक्रमित मिला। पीड़ित बच्चे के साथ आए समाजसेवी महिंदर सिंह और जतिंदर सिंह ने कहा कि ब्लड बैंक कर्मियों की गलती के कारण थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे लगातार एचआईवी संक्रमित आ रहे हैं।
बच्चे की मां ने बताया कि उनका बेटा चार बहनों का इकलौता भाई है। सेहत मंत्री बलवीर सिंह सिद्धू का कहना है कि मामले की जांच एड्स कंट्रोल सोसाइटी चंडीगढ़ कर रही है। एड्स कंट्रोल सोसाइटी चंडीगढ़ की डॉ. सुनीता ने बताया कि सोमवार को उनकी सोसाइटी से एक टीम बठिंडा में जाकर सात नवंबर वाले मामले की जांच करके आई है। अंतिम जांच रिपोर्ट बुधवार को उन्हें मिलेगी। उन्होंने दावा किया कि अगर जांच में कोई भी आरोपी पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए सेहत विभाग के उच्च अधिकारियों को लिखा जाएगा।