पाकिस्तान में फांसी पर रोक हटने से भारतीय कैदी कृपाल सिंह की जान पर खतरा बढ़ गया है। सरबजीत की तरह लाहौर की कोट लखपत जेल में 22 साल से बंद गुरदासपुर के कृपाल को सुनाई गई फांसी की सजा पर अमल पिछले आठ साल से टला हुआ है। उसके परिवार वाले मानवाधिकार संगठनों के जरिये पाक में हर दर पर गुहार लगा चुके हैं लेकिन उसकी सजा कम नहीं हो सकी।
लाहौर के वरिष्ठ पत्रकार खालिद महमूद ने वीरवार को फोन पर बताया कि कोट लखपत में 10 के करीब ऐसे कैदी बंद हैं जिन्हें कई साल पहले फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है। इनमें गुरदासपुर के गांव मुस्तफाबाद का कृपाल सिंह भी शामिल है, जिस पर लाहौर में बम धमाके और जासूसी करने के आरोप लगे हैं। कृपाल को बैरक नंबर 7 में रखा गया है जिसे डेथ सेल कहा जाता है।