पंजाब में आग्जीलरी नर्सिंग एंड मिडवाइफ (एएनएम) की पढ़ाई करने के लिए विद्यार्थी के पंजाब निवासी होने की शर्त को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। इंडियन नर्सिंग काउंसिल की ओर से इस संबंध में जारी किए गए सर्कुलर को सिरसा निवासी एक छात्रा और माता सुंदरी एजुकेशनल वेलफेयर सोसाइटी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
जस्टिस आरके जैन ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए दोनों याचिकाओं को सही ठहराया और कहा कि नर्सिंग काउंसिल आफ इंडिया का सर्कुलर सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है। इसके साथ ही यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद-14 का भी उल्लंघन है।
इंडियन नर्सिंग काउंसिल ने 25 जून, 2015 को एक सर्कुलर जारी कर पंजाब में एएनएम कोर्स में दाखिले के लिए जो अनिवार्य शर्तें निर्धारित की थी, उनके तहत यह भी अनिवार्य कर दिया था कि इस कोर्स में दाखिला लेने वाले पंजाब के ही निवासी होने चाहिए। इस सर्कुलर के खिलाफ माता सुंदरी एजुकेशनल वेलफेयर सोसाइटी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सर्कुलर को गैरकानूनी बताया।
सोसाइटी का कहना था कि किसी भी तरह से अन्य राज्यों के विद्यार्थियों को पंजाब के कॉलेजों में दाखिला लेने से रोका नहीं जा सकता और शत प्रतिशत दाखिले प्रदेशवासी होने के आधार पर भी नहीं दिए जा सकते। सोसाइटी ने अपनी याचिका में इस सर्कुलर को सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों और संविधान में निहित प्रावधानों का उल्लंघन भी करार दिया गया था। सोसाइटी की भांति ही सिरसा जिले की एक छात्रा ने भी इस सर्कुलर को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
उधर, नर्सिग काउंसिल ऑफ इंडिया ने याचिकाओं के जवाब में अपने सर्कुलर का बचाव करते हुए कहा कि यह प्रावधान इसलिए किया है ताकि पंजाब में इस कोर्स को पूरा करने वाले पंजाब में ही अपनी सेवाएं दें। काउंसिल का कहना था कि पंजाब के देहाती इलाकों में स्थानीय भाषा ही समझी जाती है।
ऐसे में स्थानीय निवासी ही देहात के लोगों को उनकी भाषा में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवा सकेंगे। इस पर सिरसा की छात्रा का कोर्ट से कहना था कि भले ही वे हरियाणा की निवासी हैं, लेकिन उनका जिला पंजाब से सटा होने के कारण वे पंजाब की स्थानीय भाषा को पूरी तरह समझती हैं। ऐसे में कोर्स में दाखिले के उनके दावे को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए।