कालका रेलवे क्वार्टर के पास 26 जनवरी को मिली अनामिका का शिशु गृह में नाम बदलकर वंशिका रख दिया गया है।
सेक्टर-6 के जनरल अस्पताल से मेडिकली फिट होने के बाद उसे बुधवार को ही सेक्टर-15 शिशु गृह भेज दिया गया था और यहां भी यह बच्ची बहुत जल्द सबकी दुलारी बन गई।
शिशु गृह की सुपरिंटेंडेंट कमला राठी ने बताया कि जब बच्ची को यहां लाया गया, तब वह सो रही थी। शाम छह बजे उसकी आंख खुली तो रोने लगी, लेकिन दूध पिलाते ही चुप हो गई।
उसकी आदतें काफी अच्छी हैं। जब भूख लगता है तभी रोती है, वरना खेलती रहती है।
वीरवार को रखा नया नाम
जब भी कोई लावारिस बच्चा मिलता है तो शिशु गृह में आने के बाद हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद द्वारा उसका नामकरण किया जाता है।
परिषद के प्रोजेक्ट अधिकारी सुधीर कांत ने बताया कि शिशु गृह में आने के बाद वीरवार को बच्ची का नया नाम वंशिका रखा गया है।
जब तक बच्चे को कोई गोद नहीं लेता है, तब तक परिषद द्वारा दिए गए नाम से ही पहचानी जाएगी।
स्टाफ नर्सों ने मिस किया
सेक्टर-6 के जिस जनरल अस्पताल के निकू वार्ड में बच्ची का उपचार हुआ और स्टाफ नर्सों ने मां की तरह पाला, उन्होंने वीरवार को बच्ची को काफी मिस किया।
दिनभर उसकी चर्चा होती रही। उसके साथ खेलना, उसकी शरारत व मुस्कान...। नर्सें हर एक गतिविधियों को याद करती रहीं।
अनामिका को नहलाने और उसके शरीर पर तेल मालिश करने की ड्यूटी हमारी थी। अब तो आदत सी हो गई थी। वीरवार को पूरे दिन उसे मिस किया। वह जहां भी रहे, खुश रहे। यही मेरी दुआ है।
पूनम सैनी, नर्स
मां-बेटी जैसा नाता हो गया था अनामिका से। अब तो उसके बिना दिल ही नहीं लगता।
अनीता, नर्स