पंजाब की 13 लोकसभा सीटों के लिए कांग्रेस ने लोकसभा उम्मीदवारों की पहली सूची में पूर्व सीएम चरणजीत चन्नी को उतारकर दलित वोटरों को अपनी तरफ खींचने की योजना बनाई है। कांग्रेस ने छह उम्मीदवारों की घोषणा की है। इनमें दो सांसदों गुरजीत औजला और डॉ. अमर सिंह को दोबारा टिकट दी गई है। वहीं, बठिंडा में अकाली दल को पूरी तरह से घेरने के लिए अकाली दल के नेता रह चुके जीत मोहिंदर सिद्धू को टिकट दिया है।
अमृतसर में पूर्व डिप्टी ओपी सोनी पर दो बार सांसद रहे गुरजीत औजला भारी पड़े हैं। उन पर तीसरी बार कांग्रेस ने दांव खेला है। बठिंडा से पूर्व विधायक जीत महिंदर सिद्धू को उम्मीदवार बनाया गया है। यहां से पंजाब कांग्रेस प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग अपनी पत्नी अमृता वड़िंग के लिए पैरवी कर रहे थे। तलवंडी साबो से अकाली दल के पूर्व विधायक सिद्धू पुराने कांग्रेसी हैं। वह 2014 में अकाली दल में शामिल हो गए थे। उस वक्त वह कांग्रेस विधायक थे, और इसके कारण अगस्त 2014 में उपचुनाव की आवश्यकता पड़ी, जिसे उन्होंने शिअद के टिकट पर जीता।
सिद्धू 2002, 2007 और 2012 में तलवंडी साबो से तीन बार कांग्रेस विधायक रहे। 2017 और 2022 में उन्होंने अकाली दल के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन आप की बलजिंदर कौर से हार गए। इसके बाद 2023 में वह कांग्रेस में शामिल हो गए थे। कांग्रेस ने जीत मोहिंदर सिद्धू के जरिए बठिंडा में अकाली दल का किला ध्वस्त करने की योजना तैयार की है, जहां से बीबी हरसिमरत कौर सांसद हैं।
वहीं जालंधर से पंजाब के पूर्व सीएम चरणजीत चन्नी को टिकट दी गई है। कांग्रेस ने यहां से सांसद संतोख चौधरी परिवार की टिकट काट दी है। सांसद चौधरी का राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में निधन हुआ था। इसके बाद उनकी पत्नी कर्मजीत चौधरी को उपचुनाव लड़ाया गया था, लेकिन वे हार गईं। इस बार चौधरी परिवार उनकी टिकट का विरोध कर रहा था। इसे कांग्रेस ने दरकिनार कर चन्नी पर विश्वास कर दलित वोटरों पर नजर रखी है।
32 फीसदी दलित आबादी है पंजाब में
पंजाब में फिलहाल दलितों की आबादी 32 फीसदी है, जबकि जट सिखों की आबादी 20 फीसदी के आसपास है। 2022 के विधानसभा में कांग्रेस ने चन्नी को बतौर सीएम प्रोजेक्ट किया था और दोआबा की 23 में से नौ सीट कांग्रेस की झोली में गई और कांग्रेस की साख बची। इसके पीछे दोआबा के 42 फीसदी दलित वोटरों का चन्नी की तरफ झुकाव था। आप की आंधी में भी जालंधर की नौ सीटों में से कांग्रेस को पांच व आम आदमी पार्टी को चार सीटें हासिल हुई हैं। 2017 के चुनाव में यहां से कांग्रेस को छह व अकाली दल को तीन सीटें मिली थी। कांग्रेस को चन्नी के जरिये उम्मीद है कि इसका प्रभाव दलित वोटरों पर पड़ेगा।
विरोध के बावजूद गांधी पर खेला दांव
लोकसभा चुनाव को लेकर पटियाला सीट से सभी प्रमुख राजनीतिक दलों की तरफ से अपने उम्मीदवारों की घोषणा करने से तस्वीर साफ हो गई है। कांग्रेस ने विरोध के बावजूद पूर्व सांसद डॉ. धर्मवीर गांधी पर ही दांव खेला है। पूर्व विधायक हरदियाल सिंह कंबोज व रजिंदर सिंह उनका विरोध कर रहे थे। भाजपा ने यहां से परनीत कौर, आप ने सेहत मंत्री डा. बलबीर सिंह, अकाली दल ने एनके शर्मा और बसपा ने जगजीत छड़बड़ को टिकट दी है। कांग्रेस ने परनीत के मुकाबले उन्हें ही 2014 के लोकसभा चुनावों में हराने वाले डॉ. धर्मवीर गांधी को मैदान में उतार कर नए समीकरण बनाने की कोशिश की है।
राजपुरा से पूर्व विधायक हरदियाल सिंह कंबोज का कहना है कि पार्टी हाईकमान कांग्रेस के किसी ब्लॉक प्रधान या बूथ वर्कर को ही टिकट दे देती तो उन्हें किसी तरह का एतराज नहीं होता। एक तरफ जहां पूर्व विधायकों हरदियाल सिंह कंबोज, मदन लाल जलालपुर, राजिंदर सिंह की तरफ से डा. गांधी का विरोध किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ पूर्व कैबिनेट मंत्री ब्रह्म मोहिंदरा व उनके बेटे व पंजाब यूथ कांग्रेस के प्रधान मोहित मोहिंदरा की ओर से डॉ. गांधी को पटियाला में आयोजित कांग्रेस वर्करों की बैठक के लिए बुलाया गया। इस मौके पर डॉ. गांधी ने पटियाला देहाती हलके के 13 मंडलों के नवनियुक्त पदाधिकारियों को संबोधित भी किया।
टकसालियों को साथ लेकर चलना औजला के लिए चुनौती
सांसद गुरजीत सिंह औजला को कांग्रेस ने अमृतसर से तीसरी बार लोकसभा की टिकट देकर विश्वास जताया है। औजला के लिए इस बार भी अमृतसर की सीट जीतकर हाईकमान की झोली में डालना चुनौतीपूर्ण होगा, क्योंकि कांग्रेस के टकसाली नेता गुरजीत सिंह औजला के हक में न होकर पूर्व उपमुख्यमंत्री ओम प्रकाश सोनी के हक में टिकट की मांग कर रहे थे।
टकसालियों का कहना था कि औजला का निचले स्तर में वर्करों से कोई संबंध नहीं है। अगर कांग्रेस सिख चेहरे को टिकट देना चाहती है, तो अमृतसर से इंद्रबीर सिंह बुलारिया को टिकट दी जाए। औजला के पक्ष में कोई भी टकसाली खड़ा दिखाई नहीं दिया। वहीं अब कांग्रेस ने तीसरी बार गुरजीत औजला को अमृतसर से टिकट देकर टकसालियों की मांग को ठुकराया है। अब औजला के लिए टकसालियों को साथ लेकर चलना आसान नहीं होगा। 2017 के लोकसभा उपचुनाव में कांग्रेस ने गुरजीत सिंह औजला को मैदान में उतारा था। औजला अमृतसर लोकसभा सीट के 20 सालों के इतिहास में सबसे अधिक 5,08,153 वोट लेकर विजय हुए थे। 2019 में औजला 4,45,032 वोटों के साथ फिर विजयी हुए।