-अमृतसर पुलिस कमिश्नर की निगरानी में होगी उच्चस्तरीय जांच, जिम्मेदारी और साजिश के हर पहलू की पड़ताल
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संवाद न्यूज एजेंसी अमृतसर। श्री गुरु ग्रंथ साहिब के 328 पावन स्वरूपों के गायब होने के गंभीर मामले की जांच अब विशेष जांच टीम (एसआईटी) करेगी। पंजाब सरकार ने बढ़ते लोगों के दबाव और निष्पक्ष जांच की मांग के बीच पंजाब ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन के तहत उच्चस्तरीय एसआईटी का गठन किया है। यह टीम अमृतसर के पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर की निगरानी में काम करेगी।
सरकारी आदेशों के अनुसार एसआईटी के चेयरमैन एआईजी विजिलेंस एसएएस नगर (मोहाली) जगतप्रीत सिंह को बनाया गया है। टीम में अमृतसर, पटियाला और लुधियाना के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को शामिल किया गया है। आवश्यकता पड़ने पर अन्य अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों को भी जांच में शामिल किया जा सकेगा।
क्या-क्या जांचेगी एसआईटी
पुलिस अधिकारियों के अनुसार एसआईटी लापता 328 स्वरूपों के रखरखाव, उनके स्थानांतरण, संबंधित रिकॉर्ड और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की गहन जांच करेगी। यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही का है या इसके पीछे कोई सुनियोजित साजिश और रिकॉर्ड में हेरफेर शामिल है।
एफआईआर में किन पर मामला दर्ज
इस मामले में 7 दिसंबर 2025 को अमृतसर के थाना सी डिवीजन में एफआईआर दर्ज की गई थी। एफआईआर में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) से जुड़े 10 प्रमुख पदाधिकारियों और सदस्यों के नाम शामिल किए गए हैं। इनमें पूर्व मुख्य सचिव डॉ. रूप सिंह, धर्म प्रचार समिति के पूर्व सचिव मनजीत सिंह सहित गुरबचन सिंह, सतिंदर सिंह, निशान सिंह, परमजीत सिंह, गुरमुख सिंह, जुझार सिंह, बाज सिंह और दलबीर सिंह शामिल हैं। इसके अलावा कमलजीत सिंह, कुलवंत सिंह, जसप्रीत सिंह और अमरजीत सिंह के नाम भी एफआईआर में दर्ज हैं।
कब और कैसे सामने आया मामला
वर्ष 2015-16 में एसजीपीसी के प्रकाशन विभाग से श्री गुरु ग्रंथ साहिब के 328 पावन स्वरूप लापता होने का मामला सामने आया था। इसके बाद सिख समुदाय में भारी रोष फैल गया। सिख सद्भावना दल और अन्य सिख संगठनों ने चार वर्षों तक श्री हरिमंदिर साहिब की ओर जाने वाली हेरिटेज स्ट्रीट पर धरना देकर निष्पक्ष जांच की मांग की थी। तत्कालीन अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह के निर्देश पर जब एडवोकेट इशर सिंह से जांच करवाई गई तो रजिस्टरों में दर्ज स्वरूपों की संख्या और मौके पर मौजूद स्वरूपों में भारी अंतर पाया गया। जांच में सामने आया कि न तो सुरक्षित स्थानांतरण का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड है और न ही यह पता चल सका कि स्वरूप किसके आदेश पर और कहां ले जाए गए।
साजिश की आशंका
पुलिस का मानना है कि यह मामला केवल लापरवाही तक सीमित नहीं हो सकता। रिकॉर्ड में हेरफेर और सुनियोजित साजिश की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। एफआईआर के बाद सिख संगत और धार्मिक संगठनों में रोष और तेज हो गया, जिससे उच्चस्तरीय जांच की मांग और मजबूत हुई।
एसजीपीसी ने एफआईआर और एसआईटी गठन का किया विरोध
श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज और एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताया है। सिख संगत ने मामले को आस्था और मर्यादा से जुड़ा बताते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है। मामले की संवेदनशीलता और सामाजिक प्रभाव को देखते हुए अब एसआईटी की जांच पर पूरे सिख समाज और पंजाब की निगाहें टिकी हैं।