मोहाली की संस्था किसान आंदोलन में मुहैया करा रही किताबें।
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तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन में साहित्य अहम भूमिका निभा रहा है। किताबें आंदोलनरत किसानों में जोश भर रही हैं। आंदोलन में किताबें मुहैया कराने में मोहाली की संस्था तर्कशील सोसाइटी पंजाब और चंडीगढ़ की कई इकाईयां अहम भूमिका निभा रही हैं। वहीं किसान भी इस पहल की खूब सराहना कर रहे हैं।
किसान आंदोलन में दिल्ली गए किसान वैसे तो पूरे दिन संघर्ष और विभिन्न कामों में व्यस्त रहते हैं। युवा उन्हें मोबाइल इंटरनेट, लैपटॉप जैसी तकनीक करा रहे हैं तो कुछ युवा किताबें की जानकारी दे रहे हैं। कुछ युवा सिख इतिहास की किताबों के स्टॉल जगह-जगह लगाकर लोगों को पढ़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। ऐसे में तर्कशील सोसायटी ने भी बहुचर्चित किताबों का स्टॉल लगाया है। मोहाली-चंडीगढ़ और खरड़ शाखाओं के सदस्य छह लाख किताबें आंदोलन में भेजीं हैं। मोहाली की तर्कशील सोसायटी के सदस्य सतनाम सिंह दाऊं ने बताया कि दिल्ली में किसानों को हर तरह की सेवा पहुंच रही है।
हमने देखा है कि कुछ युवाओं ने मिनी लाइब्रेरी भी बनाई है। ऐसे में तर्कशील सोसायटी ने भी वहां बैठे लोगों को तर्क वाली किताबों से रूबरू करने के बारे में सोचा। इसके बाद धरनास्थल पर तर्कशील की प्रसिद्ध किताबों की प्रदर्शनी लगाई गई। यह किताबें पंजाबी के अलावा हिंदी में भी हैं। दिल्ली में सोसायटी के कुलविंदर नागरी, सुखवीर कौर, बिक्रमजीत सोनी, सुरिंदर सिम्बलमाजरा, भूपिंदर मदनहेडी, जसपाल बडाला, जगविंदर सिम्बलमाजरा नेहा और सुल्तान मोहम्मद, शमशेर सिंह हरप्रीत, जसवंत मोहली सतविंदर चुन्नी, सतनाम दाऊं, नीरज दाऊं, करम सेखा, हरप्रीत कौर दिल्ली पहुंचे हैं।