इसके बाद एक महिला थाने में आई, वह कहने लगी कि यह शव उसके पति का है, पुलिस ने हुलिया पूछा तो वह भी कुछ सही उत्तर नहीं दे पाई। बात डीएनए टेस्ट करवाने की हुई तो वह महिला भी थाने से निकल गई। इसके बाद थाने में तीसरा व्यक्ति आया और बोला कि यह शव उसके चचेरे भाई का है, जांच अधिकारी ने उसको धड़ दिखाया तो व्यक्ति ने कहा कि हां, यह शव मेरे चचेरे भाई का है। फिर डीएनए टेस्ट की बात हुई तो वह भी थाने से निकल गया।
अब पुलिस मेडिकल कॉलेज से धड़ का डीएनए टेस्ट करवाएगी। उसके लिए पैसा जमा करवाया गया है और डीएनए का सैंपल लेकर सुरक्षित रखवा दिया गया है। अब अगर कोई क्लेम करने के लिए आएगा तो बिना डीएनए मैच किए उसको वारिस नहीं बनाया जाएगा।
हम पहले से ही सतर्क हैं, इसलिए हमने फैसला लिया है कि डीएनए मैच के बिना इस बॉडी का वारिस किसी को घोषित नहीं किया जाएगा। मृतक की जेब से कोई दस्तावेज, मोबाइल और पर्स नहीं मिला, जिससे उसकी शिनाख्त हो पाती। - बलवीर घुम्मण, एसएचओ, रेलवे पुलिस