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अमृतसर ट्रेन हादसाः लोगों को पहले ही हो गया था किसी घटना के होने का अहसास, गवाह है ये बात

Sat, 20 Oct 2018 03:16 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
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अमृतसर ट्रेन हादसा
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दशहरे पर कोई बड़ा हादसा या अपशकुन होगा, इसका अहसास लोगों को पहले से ही हो गया था। इसकी गवाह है ये बात, जो कई दिन से सोशल मीडिया पर वायरल भी हो रही है। दरअसल, सोशल मीडिया पर एक पोस्टर वायरल हो रहा है, जो अमृतसर में हुए दशहरा उत्सव का है।
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इस पोस्टर पर पंजाबी भाषा में लोगों को कार्यक्रम में आने का न्योता दिया गया। लेकिन यह पोस्ट वायरल हुआ, वजह है इसमें की गई गलती, शब्दों की गलती। इस गलती ने लाइन का मतलब बिल्कुल बदल दिया, जिसे एक अपशकुन के तौर पर लिया जा रहा है।

पोस्टर में लिखा है नेकी पर बदी की जीत, जबकि यह सही में होना चाहिए था, बदी पर नेकी की जीत। शब्दों की इसी गलती की वजह से यह पोस्टर सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। अब क्योंकि दशहरे पर अमृतसर में इतना बड़ा हादसा हो गया, तो लोग इसे ही वजह मान रहे हैं।
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लोगों का कहना है कि अपशकुन तो पहले ही हो गया था। कुछ भी सही नहीं हुआ, सब गलत हुआ। अब एक दूसरे पर आरोप लगाने, विरोधी बयानबाजी करने से क्या होगा। जिन लोगों की मौत आई थी, वे तो चले गए। अब इस तरह की बातें करके उन्हें वापस तो नहीं लाया जा सकता।
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ट्रेन के नीचे कुचले गए 61 लोग

Amritsar train accident - फोटो : PTI
दशहरा पर्व पर खुशियां मना रहा देश उस वक्त मातम में डूब गया, जब अमृतसर में  ट्रैक पर खड़े होकर जलते रावण को देख रहे लोगों को ट्रेन रौंदकर गुजर गई। पल भर में 61 लोगों की मौत हो गई, 70 से ज्यादा घायल हो गए। भयावह मंजर पसर गया और देखते ही देखते चीख-पुकार मच गई।

जौड़ा बाजार फाटक के पास दशहरा पर्व के दौरान रावण दहन के वक्त शुक्रवार शाम 6.45 बजे मैदान में भारी भीड़ के कारण लोग पास ही रेलवे ट्रैक पर खड़े होकर कार्यक्रम देख रहे थे। इसी दौरान जालंधर-अमृतसर डेमू ट्रेन आ गई। पटाखों के शोर से लोग हॉर्न नहीं सुन पाए और ट्रेन उन्हें रौंदती हुई गुजर गई। मृतकों में बच्चे, महिलाएं व 16 से 19 साल के युवा भी हैं।

चश्मदीद सन्नी ने बताया, हादसे के पहले जौड़ा फाटक से अन्य दो ट्रेनें भी गुजरीं, तब लोग ट्रैक से हट गए। इसके बाद जब रावण जल रहा था, तब डेमू ट्रेन 74943 गुजरी। लोग पटाखों की आवाज के कारण हॉर्न नहीं सुन पाए और बचने का मौका भी नहीं मिला। रेलवे इतिहास में ऐसा भीषण हादसा कभी नहीं हुआ। घटनास्थल पर 150 मीटर तक शव बिखर गए।
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