इसे इत्तेफाक कहें या दुर्भाग्य, 10 साल पहले जिस ट्रैक पर पिता की मौत हुई थी, उसी ट्रैक पर 'रावण' की जान चली गई, लेकिन जाते-जाते वो बहादुरी वाला काम कर गया। ऐसा काम, जिसे वो तीन जिंदगियां ताउम्र नहीं भूल पाएंगी। अगर वो न होता तो अमृतसर ट्रेन हादसे में मरने वालों की संख्या में तीन और जुड़ जाते।
हम बात कर रहे हैं, रावण का किरदार निभाने वाले दलबीर सिंह की, जो जौड़ा फाटक पर हुए हादसे में ट्रेन के नीचे कुचले गए। हालांकि जाते जाते दलबीर तीन लोगों को जिंदगी दे गया। दलबीर (32) शुक्रवार को आखिरी दिन की रामलीला का मंचन होने के बाद अपनी ड्रेस घर पर रखकर रावण दहन देखने आया था।
ट्रैक पर उसने ट्रेन आती देखकर तीन लोगों को खींचकर उनकी जान बचाई, लेकिन खुद को नहीं बचा सके। 10 साल पहले इसी ट्रैक पर उनके दृष्टिहीन पिता की भी मौत हुई थी। दलबीर की आठ महीने की बेटी है। दलबीर को रामलीला से काफी लगाव था और हर साल उत्सुकता से इसका इंतजार करता था।