मंगलवार को ही गया था श्रीनगर
अमृतपाल सिंह (31) लकड़ी का काम करता है। वह गुरदासपुर निवासी एक ठेकेदार के कहने पर मंगलवार को ही रोहित मसीह (25) को हेल्पर के तौर पर साथ लेकर श्रीनगर काम करने गया था। बुधवार शाम आतंकियों ने दोनों को गोलियां मार दीं। अमृतपाल सिंह की तो मौके पर ही मौत हो गई जबकि रोहित मसीह ने उपचार के दौरान अस्पताल में दम तोड़ दिया था।
परिवार को जब घटना की सूचना मिली तो वह सलामती की दुआ करने लगे। अमृतपाल पांच भाई-बहनों के परिवार में सबसे छोटा था। घर में गरीबी के चलते 12वीं के बाद ही वह लकड़ी (कारपेंटर) के काम में अपने पिता का हाथ बंटाने लगा था। इससे पहले भी वह श्रीनगर में कारपेंटर का काम कर चुका था। जबकि रोहित की छोटी बहन 11वीं में पढ़ रही है और वह खुद 12वीं तक पढ़ने के बाद परिवार की मदद के लिए काम में जुट गया था।
पंजाब सरकार ने की आर्थिक मदद
अमृतपाल सिंह और रोहित मसीह के परिवारों को सरकार ने दो-दो लाख रुपये की आर्थिक मदद प्रदान की है। मंत्री कुलदीप सिंह गुरुवार की देर शाम पीड़ित परिवारों से शोक संवेदना व्यक्त करने पहुंचे। उन्होंने पीड़ित दोनों परिवारों के साथ अफसोस व्यक्त किया और पंजाब सरकार की ओर से दो-दो लाख रुपये के चेक सौंपे। धालीवाल ने कहा कि दुख की इस घड़ी में सरकार उनके साथ खड़ी है।