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कैप्टन ने सभी मंत्रियों से मांगी समीक्षा रिपोर्ट, योजनाओं के फंड पर नज़र

Sat, 01 Apr 2017 10:59 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह - फोटो : file photo
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पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपने मंत्रियों को उनके विभागों की ओर से रोके गए बुनियादी ढांचा विकास प्रोजेक्टों के स्तर का जायजा लेने का निर्देश दिया है। साथ ही इसकी समीक्षा रिपोर्ट अगले दो हफ्ते में पेश करने को कहा है। इसी आधार पर सरकार विकास योजनाओं के रोके गए और प्रयोग न हुए फंडों को जारी करने पर अंतिम फैसला लेगी। मंत्रियों की ओर से स्वीकृत प्रोजेक्ट पंजाब बुनियादी ढांचा विकास बोर्ड (पीआईडीबी) की कार्यकारी कमेटी को अगली कार्रवाई के लिए भेजे जाएंगे।
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जबकि ऐसे मामले, जिनमें अनियमितता का संदेह हो, उनकी जांच करवाई जाएगी। यह समूची प्रक्रिया 30 अप्रैल तक पूरी कर ली जाएगी। यह सभी शनिवार को निर्णय कैप्टन अमरिंदर सिंह की अध्यक्षता में हुई पंजाब बुनियादी ढांचा विकास बोर्ड की समीक्षा बैठक के दौरान लिए गए। बैठक में वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल, स्थानीय निकाय मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू और देहाती विकास मंत्री तृप्त राजेंद्र सिंह बाजवा के अलावा मुख्य सचिव करन अवतार सिंह, मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव सुरेश कुमार, पीआईडीबी के प्रबंधकीय निदेशक डीके तिवाड़ी भी उपस्थित थे। 
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नई सरकार में जांच के अधीन प्रोजेक्ट

कैप्टन अमरिंदर सिंह - फोटो : file photo
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपनी पहली मंत्रिमंडल बैठक के दौरान सभी विभागों को अब तक प्रयोग न हो पाने वाले फंड वापस लेने और उन लंबित पड़े प्रोजेक्टों का जायजा लेने का फैसला किया था, जिनके लिए यह फंड स्वीकृत किये गये थे। पिछली सरकार के अधीन पीआईडीबी द्वारा लगभग 6201.50 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट स्वीकृत किए थे, जो अब नई सरकार में जांच के अधीन है। इन प्रोजेक्टों के लिए फंड संबंधित विभागों द्वारा जारी करने हैं।

इन प्रोजेक्टों के फंड लिए गए वापस
अर्बन मिशन (1267.67) करोड़ रुपये, ग्रामीण मिशन (167.51) करोड़ रुपये, सीवरेज़ एवं जलापूर्ति अधीन अर्बन मिशन (2555.19 करोड़ रुपये), सड़क सेक्टर (369.48 करोड़ रुपये), देहाती जलापूर्ति प्रोजेक्ट (242.10 करोड़ रुपये) और सीएसएस/नाबार्ड स्कीमों के फंड (381.06 करोड़ रुपये)

इन प्रोजेक्टों का अभी जारी होना है फंड
सिंचाई (100.84 करोड़ रुपये), पर्यटन (98.31 करोड़ रुपये), प्रशासकीय सुधार (39.45 करोड़ रुपये) और उच्च/स्कूल शिक्षा (17.60 करोड़ रुपये)। इसके अतिरिक्त चल रहे अन्य पुराने कार्यों में 928.06 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट शामिल हैं, जिनमें बीआरटीएस और जमीन के बढ़े हुए मुआवजे के फंड भी शामिल हैं। 
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