चंडीगढ़ की शान सुखना लेक के लिए वीड के बाद अमेरिकी कमल नई मुसीबत बन गया है। इससे लेक को तीन बड़े खतरे हैं। लेक में अमेरिकी कमल (नेलुंबो लुटिया) बर्ड्स वाचिंग वाले एरिया से सुखना की ओर तेजी से बढ़ रही है।
अधिकारियों की इस पर नजर नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि सुखना में वीड का खतरा तो था। साथ में अमेरिकी कमल भी एक खतरे के तौर पर बढ़ रहा है। यदि इसे जल्द ही नहीं हटाया गया तो लेक के लिए एक नई परेशानी खड़ी हो जाएगी।
करीब दो महीने पहले तक अमेरिकी कमल सुखना के साथ लगते डैम में थी, लेकिन अब यह धीरे-धीरे सुखना में तेजी से बढ़ गई है।
जहां कमल वहां वीड नहीं
पंजाब यूनिवर्सिटी के बाटनी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर अमरीक सिंह आहलुवालिया ने जांच में पाया कि जहां-जहां कमल है, वहां से वीड खत्म होती जा रही है। कमल धूप को रोक रहे हैं, जिससे वीड नहीं पनप पा रही।
यदि इस एंगल से देखे तो फायदेमंद है, लेकिन सुखना लेक में कमल का बढ़ना भी ठीक नहीं है। इससे लेक की खूबसूरती खत्म हो रही है। यदि ये बढ़ गई तो नई मुसीबत खड़ी हो जाएगी।
इससे तीन तरह के खतरे हैं
सुखना लेक से वीड निकालने का काम करते हुए मजदूर
- फोटो : अमर उजाला
प्रोफेसर आहलुवालिया का कहना है कि कमल से लेक को तीन तरह के खतरे हैं। पहला खतरा यह है कि कमल की वजह से सुखना में धूप नहीं पहुंच रही है, जिससे जीव-जंतु व अन्य पौधों के लिए खतरा है। दूसरा, कमल लेक के पानी के न्यूट्रीशियन की खपत कर रहा है।
इससे अन्य पौधे व जीवों को न्यूट्रीशियन मिलने में परेशानी आ सकती है। यह भी लग रहा है कि कहीं कमल कोई केमिकल तो नहीं छोड़ रहा है। इस बारे में जांच कर रहे हैं। हम यह भी देख रहे हैं कि कमल के पत्ते नाजस मैरिना वीड को खत्म करने में कितने सहायक हैं। इस बारे में हमारा स्टूडेंट रिसर्च कर रहा है।
अधिकारी नहीं दे रहे ध्यान
हाईकोर्ट की फटकार के बाद भी चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारी सुखना लेक के लिए गंभीर नहीं दिख रहे हैं। कमल को आए करीब दो महीने हो गए हैं, लेकिन उन्हें हटाने की जहमत नहीं उठाई जा रही है। विशेषज्ञ कहते हैं कि यदि ये एक बढ़ गई तो उसे हटाना मुश्किल हो जाएगा। यह सुखना के इको बैलेंस को भी बिगाड़ सकती है।