चंडीगढ़ नगर निगम अपने खर्चों में कटौती के लिए कर्मचारियों की आवश्यक संख्या का आकलन कराने जा रहा है। इसके लिए पहली बार नई दिल्ली स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (आईआईपीए) से ऑडिट कराने की तैयारी की जा रही है।
ऑडिट के बाद अगर कर्मचारी ज्यादा निकलते हैं तो कई कर्मचारियों पर छंटनी की तलवार लटक सकती है। उधर, 60 वर्ष से अधिक उम्र के कर्मियों को हटाने की प्रक्रिया भी जारी है। पिछले दो महीनों में 50 से अधिक कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं।
पहली बार कर्मचारियों की संख्या का ऑडिट
नगर निगम में पहली बार कर्मचारियों की संख्या और उनकी आवश्यकताओं का ऑडिट कराने की तैयारी की जा रही है। निगम पर लगातार जरूरत से ज्यादा कर्मचारियों को भर्ती करने का आरोप लग रहा है। कई पार्षद भी इसे लेकर सवाल उठा चुके हैं और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठकों में बोल चुके हैं कि निगम में आउटसोर्स पर ज्यादा कर्मी हैं। कहा था कि निगम को यह जानने की जरूरत है कि उसे वास्तव में कितने कर्मचारियों की आवश्यकता है ताकि अनावश्यक खर्चों को रोका जा सके। इस वजह से ही ऑडिट कराने के लिए नई दिल्ली के आईआईपीए से संपर्क साधा गया और उनसे कोटेशन मांगी गई।
आईआईपीए ने ऑडिट करने के लिए हामी भरी है और छह महीने का समय मांगा है। साथ ही बताया कि इसके लिए उनकी फीस करीब 25 लाख रुपये होगी। अब निगम की तरफ से इस पर फैसला लिया जाना है। बता दें कि आईआईपीए, प्रशासनिक दक्षता और संसाधनों के उचित उपयोग में विशेषज्ञता रखता है। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार इस प्रक्रिया से वास्तविक जरूरतों का पता लगाया जाएगा और बेवजह के खर्चों को कम किया जा सकेगा।
ब्रांच के प्रमुख देंगे एफिडेविट कि नहीं की कोई नई भर्ती
आयुक्त अमित कुमार ने बताया कि इसके लिए वह विभिन्न ब्रांच व विंगों के प्रमुखों से एक एफिडेविट भी लिए जा रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने कार्यरत कर्मियों के आंकड़े भी मांगे हैं। अगर किसी भी ब्रांच में उनके आदेश जारी करने के बाद किसी नई कर्मचारी की जॉइनिंग मिली या उनके ब्रांच में 60 साल से ज्यादा उम्र का कोई व्यक्ति कार्यरत मिला तो उस ब्रांच के प्रमुख पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
दो महीने में 50-60 कर्मचारी निकाले
निगम अब वित्तीय संकट से निपटने के लिए कई कदम उठा रहा है। दिसंबर 2024 में आयुक्त अमित कुमार ने 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के आउटसोर्स कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त करने के आदेश दिए थे। निगम ने अब तक डाटा कंपाइल नहीं किया है लेकिन अधिकारियों के अनुसार अब तक 50-60 कर्मचारियों को पिछले एक से दो महीने में हटाया गया है। इसके अलावा हाल ही में 11 स्वच्छता अधिकारियों की सेवाएं भी समाप्त कर दी गई, जो नाइट पेट्रोलिंग पर होते थे। निगम ने पाया कि इस कार्य के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की आवश्यकता नहीं थी।