साल 2006 में जब स्मॉल फ्लैट्स योजना आई तो गरीबों के चेहरे खिल गए। मकानों का सर्वे हुआ तो उन्हें लगा कि अब गरीबों को खुले आसमान में नहीं रहना पड़ेगा। सैकड़ों लोगों ने मकान मिलने की खुशी में तो अपनी झोपड़ियां तक उजाड़ दीं। तब से साल दर साल बीतता गया, लोगों की आंखें आवास के इंतजार में पथरा गईं हैं। अभी तक इन्हें आवास मुहैया नहीं हो पाया। अब प्रशासक वीपी सिंह बदनौर द्वारा स्मॉल फ्लैट संशोधन स्कीम-2019 को मंजूरी मिलने से 13 साल बाद करीब 17 हजार गरीबों में एक बार फिर आवास मिलने की किरण नजर आई है।
प्रशासन ने गरीबों को आवास देने के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। स्मॉल फ्लैट स्कीम-2006 योजना के तहत में बायोमेट्रिक सर्वे के बाद भी जिन लोगों को मकान नहीं मिले थे, उनकी अपील पर प्रशासन ने एक और मौका दिया है। अपील अथॉरिटी के पास मामला पेंडिंग होने के चलते प्रशासन ने नोटिफिकेशन जारी कर इस स्कीम में संशोधन कर इसे चंडीगढ़ स्मॉल फ्लैट स्कीम-2019 किया है। इसके लिए सेक्रेटरी एस्टेट कम फाइनेंस सेक्रेटरी को अपील अथॉरिटी बनाया गया है।
30 दिन का दिया गया समय
इसके तहत कैंडीडेट अपील अथॉरिटी के आदेशों को रिव्यू करने के लिए एडवाइजर टू एडमिनिस्ट्रेटर कम रिविजनल अथॉरिटी के पास जा सकते हैं। इसके लिए 30 दिन का समय रहेगा। रिविजनल अथॉरिटी पूरे मामले को सुनने के बाद अपीलेट अथॉरिटी के फैसले को सही मान सकती है, उससे अलग राय रख सकती है और उसे पलट भी सकती है। प्रशासक ने संशोधन के बाद उन्हें यह अधिकार दिए हैं।
एस्टेट ऑफिस ने कराया था सर्वे
एस्टेट ऑफिस ने एक एजेंसी द्वारा 2006 में गरीबों को आवास देने के लिए एक सर्वे कराया था। इसमें 23 हजार 841 लोगों को आवास के लिए पात्र पाया गया था। इसके बाद एस्टेट ऑफिस ने स्थलीय सर्वे कराया तो सभी कागजात मिलाने पर 17 हजार से अधिक लोगों को पात्रता सूची में रखा गया था। तक से इन लोगोें को आवास के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
मलोया में मिल सकते हैं फ्लैट्स
जानकारी के अनुसार स्मॉल फ्लैट स्कीम के तहत अब मलोया में फ्लैट आवंटित किए हैं, लेकिन अभी तक लोगों को फ्लैट्स नहीं मिल पाए हैं। बताया जाता है कि मलोया स्कीम में ऐसे केसों की भी सुनवाई के बाद फ्लैट्स मिल सकते हैं।