अंबाला शहर से विधायक विनोद शर्मा की सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा से बनी दूरी ने अंबाला के कांग्रेसियों को संशय में डाल दिया है।
अंबाला में कांग्रेस के दो गुट पहले से ही हैं। एक गुट कुमारी सैलजा का है। जबकि दूसरा गुट विनोद शर्मा का है। इस समय दोनों गुटों के कांग्रेसी संशय में हैं।
कुमारी सैलजा पहले ही राज्य सभा में एंट्री कर चुकी हैं और विनोद शर्मा के लगातार विधानसभा सत्र में न पहुंचने से कई सवाल पैदा हो गए हैं।
राजनीतिक हलकों में विनोद शर्मा के कांग्रेस से दूरी बनाने की चर्चा ने नए समीकरण बना दिए हैं। इसी बीच नौै मार्च को कुरुक्षेत्र में जनचेतना महायज्ञ के नाम से विनोद शर्मा की रैली है।
इस रैली को लेकर पिछले कई दिनों से तैयारियां चल रही हैं। रैली में अंबाला के कांग्रेसी कितनी संख्या में पहुंचेंगे इस बात पर सवालिया निशान है।
विनोद शर्मा के नजदीकी इस मामले में कुछ कहने की हालत में नहीं हैं, क्योंकि उन्हें भी अभी तक विनोद शर्मा की तरफ से कोई संकेत नहीं मिला है।
28 फरवरी को अंबाला कैंट के विधायक अनिल विज ने सदन में चुटकी लेते हुए विनोद शर्मा के नाम का जिक्र हुड्डा के सामने किया था, लेकिन उस समय सीएम हुड्डा ने यह कहकर बात खत्म कर दी थी कि किसानों की सहमति के आधार पर अंबाला में आईएमटी बनवा दिया जाएगा।
नहीं लिया सीएम का नाम
मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नौ साल के राजनीतिक सफर में हर समय साथ रहने वाले विनोद शर्मा के हाव-भाव अब बदल गए हैं। दोनों नेताओं के बीच यह तल्खी क्यों है।
इसका कारण किसी को नहीं पता, लेकिन हरियाणा की सियासत इस समय गर्म है। बढ़ी दूरियों के संकेत रविवार को रादौर में हुई पब्लिक मीटिंग में साफ नजर आए।
यहां विनोद शर्मा ने अपने भाषण में हुड्डा सरकार के बारे में किसी तरह का कोई जिक्र तक नहीं किया।