हरियाणा के बहुचर्चित अंबाला मनरेगा घोटाले की जांच पूरी करके रिपोर्ट लोकायुक्त को भेज दी गई है। मामले में अगली सुनवाई अब 10 मार्च को होगी। माना जा रहा है कि प्रदेश के नए लोकायुक्त की नियुक्ति तब तक हो जाएगी।
शिकायतकर्ता और आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर ने बताया कि रजिस्ट्रार लोकायुक्त के समक्ष सुनवाई के दौरान स्टेट विजिलेंस ब्यूरो ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की। बताया कि वन विभाग के सातों नामजद आरोपी अफसरों को हरियाणा सरकार ने सस्पेंड कर दिया है। इन सातों अफसरों ने अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है, जिस पर आगामी दो मार्च को सुनवाई होगी।
इस मौके पर हरियाणा सरकार की ओर से पेश अफसरों ने रजिस्ट्रार लोकायुक्त को बताया कि घोटाले की विजिलेंस जांच में दोषी पाए गए तीन आईएएस व एक एचसीएस अधिकारी के खिलाफ शोकॉज जारी किया गया था, जिनका जवाब भी सरकार को मिल गया है, पर फिलहाल सरकार ने आरोपी ब्यूरोक्रेट्स के खिलाफ कार्रवाई को लेकर कोई निर्णय नही लिया है।
क्या है मामला
पीपी कपूर ने बताया कि वर्ष 2007-2010 के बीच अंबाला में करोड़ो रुपये की मनरेगा परियोजना में घोटाला किया गया। उनके द्वारा दी गई शिकायत के अनुसार, अंबाला के तत्कालीन एडीसी संजीव वर्मा और वजीर सिंह गोयत ने जांच में घोटाला तथा गबन की रिपोर्ट मिलने के बावजूद अंबाला के तत्कालीन डीसी व अन्य अधिकारियों ने वन विभाग के अधिकारियों को 25.12 करोड के चेक वितरित कर दिए।
विजिलेंस जांच में पाया गया कि अंबाला के तत्कालीन डीसी ने बिना किसी प्रशासनिक अनुमति व बिना किसी तकनीकी अनुमति के वन विभाग के अधिकारियों को चैक देकर भुगतान करवा दिया। घोटाले की विजिलेंस जांच रिपोर्ट तत्कालीन डीजीपी विजिलेंस शरद कुमार ने हरियाणा सरकार को 16 नवंबर 2012 को सौंप दी, लेकिन तत्कालीन सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की।
कपूर के अनुसार, उन्होंने घोटाले के बारे में 12 जनवरी, 2015 को सीएम विंडो पर शिकायत दी तो मौजूदा प्रदेश सरकार ने वन विभाग के मुख्य आरोपी अधिकारी जगमोहन शर्मा, डीएफओ टी अंबाला मंडल, राजेश राणा, प्रशांत शर्मा, विनोद कुमार, लक्ष्मणदास, दीपक एलहाबादी, चंद्रमोहन व सुरेंद्र नागर के खिलाफ 27 जनवरी, 2015 को एफआईआर दर्ज करने आदेश दिए, लेकिन आरोपी चार आईएएस व एक एचसीएस के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। इसी के चलते कपूर ने 30 जनवरी, 2015 को लोकायुक्त कोर्ट में यह मामला दाखिल किया।