मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सुखबीर सिंह बादल की तरफ से केंद्र द्वारा किसानों को दी गई मामूली राहत को दोगुनी करने की मांग करके किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया है। उन्होंने सुखबीर के बयान की तीखी आलोचना करते हुए सवाल किया कि शिअद केंद्र में सत्ताधारी गठजोड़ का हिस्सेदार होने के बावजूद इतने वर्षों के दौरान किसानों के मुद्दों पर सुखबीर ने चुप्पी क्यों साध रखी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने किसानों के लिए केवल 6000 रुपये सालाना का एलान करके पहले ही उनका मजाक उड़ाया है, जो रोजाना 17 रुपये बनते हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को संकट से निकालने के बजाय अकाली दल के प्रधान अब उनको और बेइज्जत कर रहे हैं। उन्होंने पूछा कि क्या सुखबीर को यह विश्वास है कि संकट में घिरे हुए किसानों को 1000 रुपये महीना देने से उनका भला हो सकता है जो कर्ज तले दबे होने के कारण आत्महत्या के रास्ते पर हैं।
उन्होंने आगे कहा कि अपने 10 सालों के शासन के दौरान संकट से जूझ रहे किसानों को एक भी पैसा देने में असफल रही अकाली-भाजपा सरकार के उलट कांग्रेस सरकार ने पहले ही 5.63 लाख छोटे और सीमांत किसानों के 4514 करोड़ रुपये के कर्ज माफ कर दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार दो साल से कम समय में समाज के प्रत्येक वर्ग को कुछ न कुछ राहत देने में सफल हुई है।
पिछली सरकार द्वारा खाली छोड़े खजाने के बावजूद यह राहत दी गई है। उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं के स्थायी हल और रास्ता ढूंढने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सुखबीर समेत पूरे बादल परिवार ने इन सालों के दौरान किसानों की भलाई के लिए कुछ भी नहीं किया और अब आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर वोट बटोरने के लिए मगरमच्छ के आंसू बहा रहे हैं।