अमर उजाला की ओर से आयोजित एमएसएमई कान्क्लेव-2016 के तहत हुए मंथन में बहादुरगढ़ के उद्यमियों ने आधारभूत सुविधा के अभाव की ओर ध्यान खींचा। उद्योग के क्षेत्र में बड़ा नाम होने के बाद भी बहादुरगढ़ औद्योगिक क्षेत्र में साफ-सफाई, सीवरेज व्यवस्था, सड़कें, पीने का पानी और यहां तक कि उद्योगों के लिए जरूरी ट्रांसपोर्ट सुविधा न होने को यहां के उद्योगों के विकास में बाधक बताया।
उद्यमी सरकार से ये सुविधाएं जल्द से जल्द चाहते हैं और विश्वास दिलाते हैं कि ऐसा होने पर यहां उद्योगों को बहुत बढ़ावा मिल सकता है। बहादुरगढ़ चैंबर आफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (बीसीसीआई) सभागार में आयोजित कार्यक्रम में फुटवियर, दवा, फेब्रिकेशन, प्लाईवुड, आटो इंडस्ट्रीज सहित अन्य उद्योगों से संबंधित कई उद्यमियों ने बढ़चढ़ कर भाग लिया। बीसीसीआई के संरक्षक सुशील गोयल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष विकास आनंद सोनी और संयुक्त सचिव हरिशंकर बहती ने भी चर्चा में भाग लिया।
मूलभूत ढांचा मजबूत करने की मांग
उद्यमियों ने बहादुरगढ़ के उद्यमियों की अनदेखी का उदाहरण देते हुए कहा कि मेक इन इंडिया और मेड इन इंडिया का नारा मेक इन बहादुरगढ़ के बिना पूरा नहीं हो सकता। एमआई के पार्ट-1, 2 और ओल्ड इंडस्ट्रियल एरिया सहित अन्य कई औद्योगिक क्षेत्रों में सड़कों की खस्ताहालत, बदहाल सफाई व्यवस्था, ठप सीवरेज व्यवस्था, श्रमिकों के लिए सुविधाओं का अभाव व सरकारी मशीनरी द्वारा उद्यमियों के शोषण के कारण यहां के उद्योगों प्रभावित हो रहे हैं।
आठ करोड़ तक की इकाइयां हों एमएसएमई में शामिल
सेमिनार में उद्यमियों ने सिंगल विंडो सिस्टम को कारगर ढंग से लागू करने, इंस्पेक्टरी राज खत्म करने, एमएसएमई की लिमिट को बढ़ाकर आठ करोड़ रुपये करने का जीओ जारी करने, औद्योगिक भूखंड हस्तांतरण की प्रक्रिया को सरल बनाने, बहादुरगढ़ में पीएफ आफिस बनाने, एनसीआर के दूसरे शहरों गुड़गांव, फरीदाबाद व नोएडा की तरह बहादुरगढ़ में भी मोबाइल व लैंडलाइन फोन पर रोमिंग हटाने और चेक बाउंस मामलों का फास्ट ट्रैक कोर्ट में अथवा किसी सक्षम आफिस द्वारा न्यूनतम निर्धारित समय में निपटारा करने की व्यवस्था करने की मांग की।