सवालः बतौर चंडीगढ़ के सांसद पिछले एक साल का अनुभव कैसा रहा
जवाबः चंडीगढ़ का अनुभव काफी अलग रहा है। यहां जो सांसद है, वही विधायक भी है क्योंकि सांसद और पार्षदों के बीच में कुछ भी नहीं है। बहुत सारे छोटे-छोटे मसले जो आमतौर पर किसी सांसद के संज्ञान में नहीं आते, यहां पर उनको भी देखने का मौका मिलता है। यह बहुत अद्भुत अनुभव है।
सवालः कार्यकाल का 20 प्रतिशत समय खत्म, चुनाव के वादे कितने पूरे हुए
जवाबः कलम की ताकत मेरे हाथ में नहीं है। कलम की ताकत भाजपा के पास है। यही ताकत हमारे पास होती तो एक साल में शहर की नुहार बदली होती। हम घोषणापत्र से भाग नहीं नहीं रहे हैं। जिन लोगों के हाथों में सत्ता है, वह शहर की भलाई नहीं चाहते। शेयर वाइज प्रापर्टी, हाउसिंग बोर्ड की नीड बेस्ड चेंज, लाल डोरा से बाहर बने मकानों को नियमित करने, पुनर्वास योजना के तहत मिले मकानों में रहने वालों को मालिकाना हक दिलाने, कोऑपरेटिव सोसाइटियों में रहने वाले लोगों की समस्याओं के लिए गवर्नर और चंडीगढ़ के प्रशासक से मिला। ये काम जब तक नहीं होंगे, मैं लगा रहूंगा।
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सवालः चंडीगढ़ में केंद्र के अधिकारियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पंजाब-हरियाणा का आरोप है कि उनका हक छीना जा रहा है
जवाबः केंद्र के अधिकारियों की बढ़ती संख्या पंजाब रीऑर्गेनाइजेशन एक्ट के विरुद्ध है। यह पंजाब और हरियाणा सरकार की कमी है कि वह अपने अधिकारों की सुरक्षा नहीं कर पा रहे हैं। छुपे हुए तरीके से केंद्र सरकार चंडीगढ़ में अपने अफसर तैनात कर रही है। अगर यही करना है तो स्पष्ट तौर पर कहना चाहिए लेकिन आधार में लटका कर रखना ठीक नहीं है।
सवालः मेट्रो को लटके डेढ़ दशक हो चुका है। ये प्रोजेक्ट लागू भी होगा या नहीं
जवाबः मैं 2019 में नितिन गडकरी से मिला था। कहा था कि अंबाला से चंडीगढ़ तक इस ओवर ग्राउंड रखा जाए, चंडीगढ़ में अंडरग्राउंड करना चाहिए। इसे कुराली तक ले जाना चाहिए। चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा से उम्मीद कर रहा है, जिनकी हालत खुद खराब है। मैंने सरकार के सबसे शीर्ष नेता को कहा है कि इसे सेंट्रल प्रोजेक्ट मानकर फंड करें। यह न सोचे कि यह कनेक्टिविटी के लिए है, बल्कि यह सोचे कि यह पूरे रीजन के लिए एक इकोनॉमी मल्टीप्लायर है।