हिंदी का नाम आता है तो लोगों को लगता है कि यह केवल एक भाषा है, जो लोग बोलचाल में ही प्रयोग करते हैं। इसके जरिये नौकरी नहीं मिल सकती, लेकिन यह गलत है। हिंदी में बेहतर पढ़ाई करके दक्ष होना होगा। इसके बाद नौकरियों के रास्ते खुलेंगे। शिक्षक बन सकते हैं। इसके अलावा कई विभागों में अनुवाद व अधिकारियों के पद इसी भाषा के जरिये भरे जाते हैं। बिना पूर्ण ज्ञान के नौकरियां कहीं भी नहीं हैं। प्रशिक्षण तो हर किसी चीज का पाना होगा। आइए जानते हैं क्या कहते हैं विशेषज्ञ-
अनुवादक बनकर कमा सकते हैं अच्छे पैसे
हिंदी में अनुवादक का पद महत्वपूर्ण है। इसके लिए कोई भी व्यक्ति अच्छे खासे पैसे कमा सकता है, लेकिन अनुवादक बनने के लिए दक्ष होना होगा। जहां कमियां मिलीं तो नौकरी भी नहीं मिलेगी। इसलिए पहले इसकी तैयारी पूर्ण कर लें।
- डॉ. रोशन लाल, मनोविज्ञान विभाग पीयू
हिंदी के प्रति आत्मविश्वास जगाना होगा
देखने में आ रहा है कि अंग्रेजी बोलने वाले लोगों को अधिक महत्व दिया जाता है और हिंदी वाले लोग कमजोर महसूस करते हैं, लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए। हिंदी व अंग्रेजी एक भाषा है। हिंदी के प्रति आत्मविश्वास बढ़ाना होगा।
- डॉ. अजय रंगा, यूआईएलएस विभाग, पीयू
गैर हिंदी भाषी क्षेत्रों में भी मिले बढ़ावा
हिंदी हमारी राष्ट्रीय भाषा है, इसे गैर हिंदी भाषी क्षेत्रों में भी बढ़ावा मिलना चाहिए। यह तभी संभव है जब सरकारी और गैर सरकारी संस्थाएं कामकाज में इसका व्यापक इस्तेमाल करें। हिंदी के प्रति लोगों को कैसे आकर्षित किया जाए, इसके लिए शिक्षाविदों, साहित्यकारों, रंगकर्मियों, समाजसेवियों और सरकार को मिलकर काम करना चाहिए। भाषा न सिर्फ संवाद का माध्यम है, बल्कि यह विचारों और भावनाओं को व्यक्त करने के लिए है।
- देवेंद्र शर्मा, समाजसेवी
हिंदी सिर्फ भाषा नहीं संस्कार है
आज युवा पीढ़ी का एक वर्ग ऐसा है जो सिर्फ अंग्रेजी के पीछे दीवाना है। अंग्रेजी सिर्फ एक माध्यम हो सकता है, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लोगों से संवाद करने का। हिंदी एक विराट माध्यम, श्रेष्ठ भाषा, एक संस्कार, एक भाव है। इसका सम्मान, इससे लगाव ठीक वैसे ही होना चाहिए जैसे हमें हमारी मां से होता है। भारत में अपनी बात अधिक से अधिक लोगों तक सही ढंग से पहुंचाने का एकमात्र सशक्त माध्यम हिंदी ही है।
- अनिल कुमार भारती, शिक्षाविद्
हिंदी का प्रयोग मैं ज्यादा करती हूं
हिंदी को बढ़ाने के लिए जरूरी है कि हम इसका इस्तेमाल ज्यादा से ज्यादा करें। मैं भी हिंदी का ही इस्तेमाल ज्यादा करती हूं। मुझे कहीं ऐसा लगता है कि हिंदी में ऑनलाइन प्रभाव आया तो इससे इसका काफी नुकसान हो गया। ऑनलाइन सिस्टम ने हिंदी को सिखा तो दिया पर अपभ्रंश हिंदी ज्यादा हो गई। यही कारण है कि अब हमे इसे उसके मूल रूप में भी लाने की आवश्यकता ज्यादा है। अब जरूरी है कि हिंदी को उसके पूर्व रूप में लौटाएं।
- रेनू अरोड़ा, लेखिका, पंचकूला
बोलचाल की हिंदी भी सुधारें
एक बड़ी अच्छी बात है कि कोई भी भाषा जैसे बोली जाएगी उसको वैसे ही लिखा जाएगा। हमें हिंदी को बेहतर करना है और उसको बढ़ावा देना है तो उसको बोलने का ढंग भी ठीक करना होगा। हरियाणा में तो हिंदी का खास महत्व है। हालांकि इसका जुड़ाव पंजाब के साथ होने की वजह से थोड़ा सा बोलचाल में बदलाव आ जाता है। अब दूसरी बात यह है कि हिंदी को बढ़ावा देने के लिए हमें अपने कामकाज हिंदी में करने की आदत डालनी होगी। यह बेहद आवश्यक है।
- इंदर वर्षा, साहित्यकार, पंचकूला