जिंदगी में अच्छी किताबें जीना सिखाती हैं। थोड़े शब्दों में कहें तो किताबें वे दोस्त होती हैं जो हमेशा आपका साथ देती हैं और मार्गदर्शन करती हैं। ऐसी ही किताबों से आपको रू-ब-रू होने का मौका मिल रहा है 19 दिसंबर को होने वाले पुस्तक मेले में।
यह अमर उजाला और सिटको के सहयोग से कराया जा रहा है। सेक्टर-17 परेड ग्राउंड में लगने वाले इस मेले में कई नामी साहित्यकारों के विचार भी जान सकेंगे।
शहर के प्रबुद्ध लेखकों ने अमर उजाला के इस प्रयास की सराहना की है और इसे बेहतर बनाने के लिए अपने विचार दिए। इनका कहना है कि इंटरनेट के जमाने में अगर बच्चों की रुचि के मुताबिक किताबें होंगी तो ऐसे आयोजन सफल सिद्ध होंगे।
स्टॉल की बुकिंग 12 दिसंबर तक
पुस्तक मेले के लिए स्टॉल की बुकिंग 12 दिसंबर तक होगी। मेले में पुस्तकों के साथ बैंक, शैक्षणिक संस्थान, पर्यटन एजेंसियां भी अपने स्टॉल लगाएंगी। इसमें बच्चों के लिए पेंटिंग, भाषण और स्लोगन राइटिंग प्रतियोगिता भी होगी। इस दौरान ऐसे कई कार्यक्रम होंगे जिनमें लेखक सिर्फ अपनी पुस्तकों ही नहीं, अपने अनुभवों से भी लोगों को रू-ब-रू कराएंगे।
विजेताओं को मिलेंगे आकर्षक इनाम
इस फेयर में लकी ड्रॉ भी होगा और विजेताओं को आकर्षक इनाम भी दिए जाएंगे। चंडीगढ़ इंडस्ट्रियल एंड टूरिज्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (सिटको) प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत करेगा।
इस बुक फेयर और क्रिसमस कार्निवल में स्टॉल बुकिंग या इससे जुड़ने के लिए 09803079803 और 08392953555 पर संपर्क किया जा सकता हैं। बुक फेयर में शामिल होने के लिए प्रकाशक और पुस्तक वितरक nagesh.amarujala@gmail.com पर भी रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं।
ये कहना है किताबों के शौकीनों का
यह एक बढ़िया प्रयास है। पुस्तक मेले में भी अगर बच्चों से जुड़ी किताबें रखीं जाएं तो ये सोने पर सुहागे जैसी बात है। आज जितना इंटरनेट और सोशल साइट का प्रभाव है, उनमें बच्चों की गतिविधियों को भी ध्यान में रखना चाहिए। किताबें उनकी रुचि के हिसाब से रखनी चाहिए। इसके अलावा मेलों में पुरानी कहानियों की किताबों की कमी भी खलती है।
- डा. पूनम, पीजी गवर्नमेंट कॉलेज, चंडीगढ़
जो बात किताबों में, वह ऑनलाइन पढ़ने में कहां :
इंटरनेट के युग में आज की पीढ़ी किताबों से दूर होती जा रही है। ऑनलाइन बुक्स पढ़ने वाले बढ़े हैं लेकिन जो बात किताबों में है, वह ऑनलाइन में कहां। हरेक की उन्नति में अच्छी पुस्तकें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। मेले में संस्कृत से संबंधित किताबें भी होंगी।
- उदयन आर्य, अध्यक्ष, संस्कृत अकादमी, चंडीगढ़।
बच्चों पर सोशल साइट्स का प्रभाव :
आजकल बच्चों पर सोशल साइट्स का इतना प्रभाव है कि उनमें पुस्तकें पढ़ने की रुचि एक तरह से खत्म हो रही है। यह अच्छा संकेत नहीं है। अभिभावकों का फर्ज है कि बच्चों को किताबों से जोड़ने के लिए प्रयास किए जाएं। किताबों को ड्राइंग और इलस्ट्रेशन के जरिए पठनीय बनाना चाहिए।
डॉ. शेखर सरकार, कोआर्डिनेटर, एनबीटी, बुक फेयर
यह खास मौका :
अमर उजाला का यह कदम बेहद सराहनीय है। जिस तरह से आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में किताबें पढ़ने का रुझान कम हो रहा है, ऐसे मेले उसे वापस लाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। शहर के लोगों के लिए यह एक खास मौका है जिसे खोना नहीं चाहिए।
- नवीन नीर, अध्यक्ष, युवा लेखक कला मंच, चंडीगढ़