फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अमर ने अपनी मेहनत के बल पर खड़ी कर दी कोरोना के योद्धाओं की सेना

विज्ञापन
अमर अपने परिवार के साथ। - फोटो : CHANDIGARH
विज्ञापन
चंडीगढ़। शहर में कोरोना के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही थी। पीजीआई प्रशासन के लिए उन मरीजों को भर्ती करना मुश्किल हो रहा था। एक-एक दिन स्थिति को और खराब करता जा रहा था। मार्च के शुरुआती दौर में नेहरू एक्सटेंशन अस्पताल को कोरोना डेडिकेटेड हॉस्पिटल बनाने का निर्णय लिया गया। यह निर्णय लेना आसान नहीं था। वहां के प्रत्येक यूनिट को कोरोना के हिसाब से व्यवस्थित करना एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन प्रो. जीडी पुरी और डॉ. विपिन कौशल के नेतृत्व में पीजीआई के एनेस्थीसिया डिपार्टमेंट के टेक्निकल ऑफिसर अमर सिंह ने मोर्चा संभाला।
विज्ञापन

अमर ने दिनरात की परवाह किए बिना टेक्निकल स्टाफ को कोरोना डेडिकेटेड हॉस्पिटल के लिए ट्रेनिंग देना शुरू किया। मौजूदा समय में अमर की कड़ी मेहनत की वजह से लगभग 200 टेक्निकल स्टाफ को पूरी तरह से ट्रेंड किया जा चुका है। वह स्टाफ कोरोना के गंभीर मरीजों के लिए बनाए गए अलग-अलग यूनिट में निडरता से ड्यूटी कर रहा है। देखते ही देखते पीजीआई में कोरोना से जंग के लिए एक मजबूत सेना तैयार हो चुकी है।
काउंसलिंग से लेकर टेक्निकल जानकारी तक दे रहे
अमर लगभग 75 दिन से बिना अवकाश लिए कोरोना डेडिकेटेड हॉस्पिटल में तैनात होने वाले टेक्निकल स्टाफ का मनोबल बढ़ाने के साथ ही उन्हें उपकरणों को चलाने, उसमें आने वाली किसी भी बाधा को दूर करने से लेकर बातों की जानकारी दे रहे हैं। अमर का घर पीजीआई परिसर में ही है, इसलिए उनकी ड्यूटी की समय सीमा तय नहीं है। देर रात या अल सुबह जब भी उन्हें कॉल आती है वह तत्काल पहुंच जाते हैं। अमर का कहना है कि इस संकट की घड़ी में भी तय समय सीमा के अनुसार नौकरी करने की बात की जाएगी तो यह अपने फर्ज व देश के साथ बेईमानी होगी। पीजीआई मेरा परिवार है और परिवार की आवश्यकता समय सीमा में बांधकर पूरी नहीं की जाती है।
विज्ञापन

ओटी से लेकर आईसीयू की व्यवस्था चौकस
अमर की दिनरात की मेहनत का ही नतीजा है कि कोरोना डेडिकेटेड हॉस्पिटल में 25 वेंटिलेटर से लैस आईसीयू सहित पोस्ट रिकवरी यूनिट व ऑपरेशन थियेटर काम कर रहा है। कोरोना के गंभीर मरीजों का बिना एक मिनट देरी से इलाज किया जा रहा है। टेक्निकल तौर पर मजबूत होने के कारण ही पीजीआई में पंजाब, हरियाणा सहित यूपी तक गंभीर मरीजों का इलाज किया जा रहा है। जब तक टेक्निकल स्टाफ को ट्रेनिंग नहीं दी गई थी तब तक पीजीआई में कोरोना के गंभीर मरीजों को इलाज देना बहुत मुश्किल काम था। अब वहां के स्टाफ मेंबर अपनी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कोरोना से जंग में उतर रहे हैं।
परिवार के साथ रहकर भी दूरी
अमर के परिवार में पत्नी बलजीत कौर जो पीजीआई में ही असिस्टेंट नर्सिंग सुपरिंटेंडेंट हैं, बेटा जसकरन और 78 वर्षीय पिता साथ में रहते हैं। कोरोना डेडिकेटेड हॉस्पिटल में ड्यूटी करने के कारण अमर आने परिवार के बीच रहकर भी उनसे दूर रह रहे हैं क्योंकि उन्हें 24 घंटे में कभी भी ड्यूटी पर बुलाया जाता है। वह घर लौटने के बाद मानकों का पालन करते हुए परिवार के लोगों से उचित दूरी बनाए रखते हैं। अमर का कहना है कि यह वक्त अपनी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए देश के लिए अपना शत प्रतिशत योगदान देने का है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें