अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और भगवंत मान
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पंजाब में आगामी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ आम आदमी पार्टी (आप) के गठबंधन पर पूरी तरह से विराम लग गया है। मंगलवार को आप की पॉलिटिकल अफेयर कमेटी (पीएसी) की बैठक में आप के प्रदेश में अलग चुनाव लड़ने को लेकर फैसले पर मुहर लग गई है।
बैठक में चुनाव के लिए उम्मीदवारों के नामों पर भी मंथन किया गया, लेकिन अभी प्रदेश के लिए उम्मीदवारों के नामों की घोषणा नहीं की गई है। दिल्ली में कांग्रेस के साथ पार्टी के गठबंधन को लेकर अभी बातचीत चल रही है। अगर ये फाइनल हो जाती है तो महीने के आखिर में वहां के उम्मीदवारों के नामों की घोषणा हो सकती है और इसी के साथ ही पंजाब के उम्मीदवार भी फाइनल किए जा सकते हैं।
बैठक के बाद पंजाब के सह प्रभारी डॉ. संदीप पाठक ने बताया कि पंजाब में दोनों पार्टियों ने अलग-अलग चुनाव लड़ने का फैसला लिया है और वह इस फैसले का सम्मान करते हैं। लेकिन लोकसभा चुनाव में अब बहुत ही कम समय बाकी रह गया है, इसलिए अब जल्द ही उम्मीदवारों की घोषणा कर दी जाएगी। बता दें कि इससे पहले मुख्यमंत्री मंत्री भगवंत मान ने भी पंजाब में रैली के दौरान घोषणा की थी कि पार्टी पंजाब में अकेले ही चुनाव लड़ेगी। यही कारण है कि कार्यकर्ताओं को जमीनी स्तर पर इसकी तैयारी शुरु करने के लिए भी निर्देश दे दिए गए हैं।
अकेले चुनाव लड़ने के ये है कारण
आप व कांग्रेस दोनों ही पार्टियों के लिए अकेले चुनाव लड़ने का प्रमुख कारण है कि दोनों ही पार्टियों के प्रमुख नेता और कार्यकर्ता एक साथ चुनाव लड़ने के लिए तैयार नहीं हो रहा है। यही कारण है कि ऐसे में पार्टी हाईकमान उन पर किसी भी तरह का फैसला थोपना नहीं चाहता है। दूसरी तरफ आप भी अपनी इस बार अपनी स्थिति मजबूत मान कर चल रही है। पिछले लोकसभा चुनाव में भी पार्टी ने 117 में से 92 सीटों पर जीत दर्ज की थी। ऐसे में लोकसभा चुनाव में भी पार्टी को ऐसे ही रिस्पांस मिलने की उम्मीद है। इसी तरह पिछले साल मई माह में जालंधर लोकसभा सीट पर हुए उप-चुनाव में भी आप उम्मीदवार सुशील कुमार रिंकू ने भारी मतों से जीत दर्ज की थी।