निटवियर क्लब के चेयरमैन विनोद थापर ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नाम पर उससे दो करोड़ रुपये मांगने का आरोप लगाया है। थापर ने दिल्ली के मुख्यमंत्री के साथ साथ दुर्गेश पाठक, पंजाब प्रभारी संजय सिंह, कपिल भारद्वाज और सुखविंदर सिंह सुक्खी के खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत की है।
थापर ने आरोप लगाया कि उनसे 11 लाख रुपये की राशि लेने के अलावा उद्योगपतियों से डिनर के एवज में बीस-बीस हजार रुपये भी लिए गए। उन्होंने पुलिस कमिश्नर को शिकायत दी है। साथ ही शिकायत की कॉपी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गवर्नर वीपी सिंह बदनौर, मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और डीजीपी सुरेश अरोड़ा को भी दी है।
वीरवार को एक प्रेस कांफ्रेंस कर विनोद थापर ने बताया कि उन्हें आम आदमी पार्टी ने इंडस्ट्रीज विंग का वाइस प्रधान बनाया था। उन्होंने काम भी किया था। उनके काम को देखते हुए उन्हें विधानसभा चुनाव में बतौर प्रत्याशी उतारने का वादा भी किया गया। जब चुनाव नजदीक आए तो इन लोगों ने दो करोड़ रुपये की मांग करनी शुरू कर दी।
पैसे लेने के लिए यह सभी अलग-अलग समय पर उनके साथ संपर्क करने में जुटे रहे। उनके साथ फोटो भी कराए गए। थापर ने आरोप लगाया कि सभी लोग उनसे पैसे भी लेकर जाते रहे। पैसे लेने के बाद इन नेताओं ने उन्हें केजरीवाल से मिलाने का वादा किया और उनको बोला गया कि वह लोगों से पैसे लेकर केजरीवाल के साथ डिनर करवाने की बात कहें। दिल्ली के मुख्यमंत्री प्रत्येक व्यक्ति से बीस हजार रुपये लेंगे। उसने पैसे तो जमा कर लिए, लेकिन केजरीवाल नहीं आए और पैसे उन्हें दे दिए गए।
उद्यमी थापर के आरोपों को आप ने किया खारिज
निटवियर क्लब के चेयरमैन विनोद थापर
हर बार इन लोगों ने उन्हें टिकट देने का झांसा देकर पैसे लिए। उसने कुछ गवाहों चरणजीव सिंह, बलकार सिंह, जसविंदर सिंह, सतवंत सिंह सैणी, प्रवीण ग्रोवर, दिनेश बजाज और पवन अरोड़ा के सामने भी पैसे दिए थे। उसके बाद भी इन लोगों ने उसे बोला कि इंडस्ट्रीज की मीटिंग करवा दें, वहां पर केजरीवाल आएंगे।
उसने होटल फार्च्यून क्लासिक में डिनर का प्रबंध कर दिया। जिसका बिल करीब एक लाख रुपये भी उसने अपनी जेब से भरा। जबकि उस समय बोला गया था कि होटल का बिल दे दिया जाएगा, जो आज तक नहीं मिला। उसके बाद तो उनका फोन भी इन लोगों ने उठाना बंद कर दिया। उनको धमकाया जा रहा है कि वह जो करना चाहे कर लें।
थापर का आरोप था कि आरोपियों ने अपना मुख्य दफतर जालंधर में खोला था, वहां पर वाई फाई लगवाया हुआ था। इनके कहने पर दफ्तर का बिल भी उसने दिया। इसके अलावा विसलिंग वुड पैलेस में केजरीवाल का प्रोग्राम था, उसका बिल भी पार्टी ने देना था, लेकिन वह बिल भी उसने दो माह बाद अपने साथियों की सहायता से दिया था।
वह पैसे भी उसे नहीं मिले। इन लोगों ने तो दिए गए पैसे की रसीद दी और न ही उनको वाइस प्रधान का पत्र दिया। यहां तक कि उनका नाम भी कंप्यूटर लिस्ट से भी उड़ा दिया गया। उन्होंने पुलिस कमिश्नर से गुहार लगाई कि आरोपी नेताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया जाए।
उद्यमी थापर के आरोपों को आप ने किया खारिज
आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता अहबाब सिंह गरेवाल और दर्शन सिंह शंकर ने उद्यमी विनोद थापर के आरोपों का खंडन किया है। गरेवाल और शंकर ने कहा कि थापर ने जो आरोप पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं के खिलाफ लगाए हैं, उनका कोई आधार और सच्चाई नहीं है। उन्होंने कहा कि थापर प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी के हाथों में खेल रहे हैं। उनको ट्रांसपोर्ट, ट्रेड एवं इंडस्ट्री विंग का प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष बनाया।
सूबे में चुनाव और कांग्रेस की सरकार बनने के तीन माह बाद थापर टिकट के लिए दो करोड़ रुपये मांगने का आरोप लगा रहे हैं। आप ने लुधियाना की चार सीट लोक इंसाफ पार्टी को गठबंधन के तहत दी। ऐसे में थापर को टिकट देने का सवाल ही पैदा नहीं होता था। दूसरे थापर ने प्रचार के दौरान लोक इंसाफ पार्टी के उम्मीदवारों के लिए प्रचार किया था। यदि आप की सरकार बनती तो थापर बड़े पद के इच्छुक थे। आप सत्ता में नहीं आई और थापर ने कांग्रेस के साथ नजदीकियां बढ़ा लीं।