संवाद न्यूज एजेंसी
मोहाली। पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की पाठ्य-पुस्तकों की छपाई से जुड़े करीब 15 साल पुराने घपले के मामले में मोहाली की अदालत ने दो तत्कालीन डिप्टी डायरेक्टरों को बरी कर दिया है। अदालत ने गुरदीप सिंह स्याल और जोगिंदर सिंह को धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश के आरोपों से मुक्त किया। अभियोजन पक्ष आरोपों को उचित संदेह से परे साबित नहीं कर सका, जिसके चलते उन्हें संदेह का लाभ दिया गया। यह मामला शैक्षणिक सत्र 2007-08 के दौरान पाठ्य-पुस्तकों की छपाई के लिए दिए गए ऑर्डर से संबंधित था। शिकायत के अनुसार, कुछ प्रिंटरों ने निर्धारित संख्या से कम किताबें सप्लाई की थीं। आरोप था कि रसीदों में छेड़छाड़ कर कम सप्लाई को अधिक दर्शाया गया, जिससे बोर्ड को आर्थिक नुकसान हुआ। शिकायत में नोएडा स्थित एक निजी प्रिंटर की ओर से ‘गणित-6 (पंजाबी)’ और ‘वातावरण-8 (पंजाबी)’ की कथित कम सप्लाई से क्रमश: करीब 20.30 लाख और 4.62 लाख रुपये के नुकसान का दावा किया गया था। अदालत ने पाया कि प्रिंटर किताबें सीधे डिपो में पहुंचाते थे। रसीदें स्टोरकीपर या संबंधित स्टाफ तैयार करते थे। रिकॉर्ड के अनुसार, दोनों डिप्टी डायरेक्टर रसीद तैयार करने की प्रक्रिया में शामिल नहीं थे। अदालत ने कहा कि दस्तावेज पर हस्ताक्षर करना लापरवाही हो सकती है, लेकिन इससे आपराधिक साजिश साबित नहीं होती।
जांच में मिलीं कमियां
अदालत ने जांच में रह गई कमियों का भी उल्लेख किया। जांच अधिकारी ने स्वीकार किया कि दस्तावेज की पूरी तरह जांच नहीं की गई थी। बोर्ड में बिल पास करने की प्रक्रिया की भी पूरी जानकारी नहीं ली गई थी। अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि इस प्रक्रिया से जुड़े अन्य अधिकारियों को आरोपी क्यों नहीं बनाया गया।
मामले का पंजीकरण
यह केस 1 अगस्त 2011 को दर्ज किया गया था। थाना फेज-8 पुलिस ने पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के तत्कालीन सचिव/वाइस चेयरमैन रणजीत सिंह बाजवा की शिकायत पर मामला दर्ज किया था। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। यह मामला करीब 15 साल पुराना था।