कादियां के अहमदिया जमात से संबंधित एक युवक की ओर से थाना प्रभारी परमिंदर सिंह के खिलाफ उसे टार्चर करने के आरोप लगाए गए। इसे सोशल मीडिया पर लोगों ने गलत रंगत देना शुरू कर दिया। वहीं अहमदिया जमात के जिम्मेदारों का कहना है कि यह एक निजी घटना है। इस घटना का जमात से कोई लेना देना नही है।
यह आरोप कादियां के थाना प्रभारी परमिंदर सिंह पर फरीद नाम के युवक ने लगाए। युवक ने आरोप लगाया कि थाना प्रभारी ने धमकी दी कि उसकी जमात के लोगों की टांगें काटकर उन्हें ब्यास नदी में फेंककर पाकिस्तान भेज दूंगा। फरीद ने बताया कि 17 जनवरी को वह फोन में सिग्नल कम होने के कारण वह बात करने के लिए दरवाजे से बाहर खड़ा था। इस दौरान पुलिस की गाड़ी रुकी और गाली गलौज करते हुए पुलिस वाले थप्पड़ मारने लगे।
फरीद ने आरोप लगाया थाना प्रभारी समेत सभी पांच मुलाजिमों ने शराब पी रखी थी। उसे जबरदस्ती जीप में बैठाकर थाने ले गए और उसे टॉर्चर किया। उसने आरोप लगाए कि पुलिस वाले नशे का फर्जी केस दर्ज करने वाले थे। उससे जबरदस्ती एक फर्जी माफीनामे पर हस्ताक्षर भी करवाए गए। वहीं डीएसपी हेड क्वार्टर माधवी शर्मा ने बताया कि उन्हें भी न तो अहमदिया समुदाय की ओर से कोई शिकायत नहीं मिली है। इस संबंधी वह बुधवार को मौके पर जाकर जांच करेंगी और सच का पता लगाएगी।
वहीं एसएचओ परमिंदर सिंह का कहना है कि आरोप बेबुनियाद हैं। युवक को सिर्फ पूछताछ के लिए थाने लेकर आए थे। वहां पर उसने बताया कि वह मूलरूप से हैदराबाद का रहने वाला है। यहां पर लकड़ी का कारीगर है। देर रात घर से बाहर खड़ा होने के कारण शक के आधार पर उसे थाने लगा गया था।
उन पर लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद है। वहीं दूसरी तरफ मीडिया में यह बात भी सामने आई कि मामला सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के संज्ञान में आने के उपरांत उन्होंने अहमदिया जमात के कादियां स्थित मुख्यालय में फोन कर इस घटना पर दुख जताया। जमात के तारिक अहमद का कहना था कि उन्हें इस बाबत कुछ नहीं पता।
सोशल मीडिया पर वायरल होते ही कैप्टन ने किया हस्तक्षेप
अहमदिया मुस्लिम समुदाय के एक युवक के पुलिस उत्पीड़न का मामला आखिरकार मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के हस्तक्षेप से शांत हुआ। यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मुख्यमंत्री के संज्ञान में भी लाया गया, जिन्होंने कादियां स्थित अहमदिया जमात के मुख्यालय में फोन कर न सिर्फ घटना पर खेद व्यक्त किया बल्कि कैबिनेट मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा को इस मामले की जांच के निर्देश भी दिए। उधर, मुख्यमंत्री द्वारा मामले पर संज्ञान लेने के चलते पुलिस महकमे में भी हड़कंप मचा और आनन-फानन में एसएसपी बटाला ने मामले की जांच के लिए कमेटी का गठन कर दिया है।
किसी की कोई शिकायत नहीं मिली है। मीडिया की रिपोर्ट के आधार पर ही डीएसपी हेड क्वार्टर को जांच करने के आदेश दिए थे। जांच में अगर प्रभारी परमिंदर सिंह दोषी पाए जाते है तो उन पर कार्रवाई होगी। - उपिंदरजीत सिंह घुम्मन , एसएसपी बटाला