ऑर्बिट बस कांड के चारों आरोपियों के खिलाफ अदालत ने आरोप तय कर दिए। एडिशनल जिला एवं सेशन जज गुरजंट सिंह की अदालत ने केस की अगली सुनवाई 3 नवंबर को तय कर गवाहों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है।
दूसरी तरफ एससी आयोग ने जिला प्रशासन से इस मामले की अब तक की गई पुलिस कार्रवाई और पीड़ित परिवार को दिए मुआवजे की रिपोर्ट तलब की है। बाघापुराना पुलिस ने ऑर्बिट बस कांड की जांच पूरी कर गत 24 जुलाई को इलाका जुडीशियल मजिस्ट्रेट (जेएमआईसी) बाघापुराना अमित कुमार गर्ग की अदालत में आईपीसी की धारा 302, 307, 354, 120-बी, 34 और एससी /एसटी एक्ट के अंतर्गत आरोप पत्र दायर कर दिया था।
इलाका मजिस्ट्रेट की अदालत में इस केस की सुनवाई के अधिकार न होने के कारण यह केस जिला एवं सेशन जज की अदालत में सुनवाई के लिए भेज दिया गया था। इस केस की पहली पेशी पर ही एडिशनल जिला एवं सेशन जज गुरजंट सिंह की अदालत ने चारों आरोपियों रणजीत सिंह, गुरदीप सिंह उर्फ जिम्मी निवासी बठिंडा, सुखविंदर सिंह उर्फ पंमा निवासी बहावल वाली थाना अबोहर जिला फाजिल्का और अमर राज दाना निवासी चक्कबखतू जिला बठिंडा के खिलाफ आरोप तय कर दिए।
ये है मामला
पीड़ित महिला छिंदर कौर निवासी गांव लंडेके ने पुलिस को दिए बयानों में आरोप लगाया था कि वह अपनी बेटी अर्शदीप कौर के साथ 29 अप्रैल को बादल परिवार की हिस्सेदारी वाली ऑर्बिट कंपनी की बस में सवार हो कर मोगा से बाघापुराना जा रही थीं।
इस दौरान आरोपियों ने अर्शदीप कौर से अश्लील हरकतें की और विरोध करने पर जाति सूचक अपशब्द बोले। फिर उन्हें (मां-बेटी) चलती बस से बाहर फेंक दिया। इससे अर्शदीप कौर की मौत हो गई जबकि छिंदर कौर गंभीर रूप से घायल हो गई थी। थाना बाघापुराना पुलिस ने ऑर्बिट बस के चालक और कंडक्टर समेत चार आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया था।