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प्रत्याशी तय करने में सभी दलों के छूट रहे पसीने, बेटे और पत्नियों के दावेदारों ने बढ़ाई धड़कने

Sat, 16 Mar 2019 06:45 PM IST
ajay kumar हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : File Photo
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पंजाब में लोकसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों के पास अभी दो महीने का समय है। सभी पार्टियों में टिकट के दावेदारों ने दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है कि जल्द से जल्द प्रत्याशियों के नामों का एलान किया जाए। लेकिन सभी पार्टियां अपने प्रत्याशी तय करने के लिए न सिर्फ संबंधित संसदीय क्षेत्रों में जातिगत, सामाजिक समीकरण को तोल रही हैं, बल्कि उनकी नजर प्रतिद्वंद्वी पार्टियों की चाल पर भी टिकी है।

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प्रदेश में सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी भले ही यह मानकर निश्चिंत दिखाई दे रही है कि मुकाबले में उसके सामने कोई मजबूत दल नहीं है। इसके बावजूद पार्टी प्रत्याशियों के चयन को लेकर चिंता में घिरी हुई है। पार्टी ने अब तक दावेदारों की सूचियां प्राप्त होने के बाद प्रदेश स्तर पर, जिलेवार पार्टी नेताओं के साथ, टिकट के दावेदारों से बातचीत वाली कई दौर की बैठकें कर ली हैं। 

इसके बाद पार्टी आलाकमान के साथ भी बैठक की जा चुकी है। पार्टी की ओर से पटियाला से परनीत कौर, फिरोजपुर से शेर सिंह घुबाया, गुरदासपुर से सुनील जाखड़, लुधियाना से रवनीत सिंह बिट्टू के नाम लगभग तय माने जा रहे हैं लेकिन सबसे बड़ी समस्या आनंदपुर साहिब, अमृतसर, फतेहगढ़ साहिब, जालंधर, बठिंडा और संगरूर सीटों पर है। जहां दावेदारों की संख्या भी काफी ज्यादा है और प्रदेश के कई मंत्री इन सीटों पर अपने बेटों या पत्नियों के लिए टिकट मांग रहे हैं।

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आनंदपुर साहिब सीट से पिछली बार प्रत्याशी रही अंबिका सोनी इस बार चुनाव लड़ने को तैयार नहीं हैं लेकिन उन्होंने बेटे के लिए इस सीट से टिकट मांगा है। वहीं लुधियाना और आनंदपुर साहिब सीटों पर हिंदू वोटरों और अमृतसर सीट पर सिख वोटरों की संख्या को देखते हुए मंथन हो रहा है। मनप्रीत बादल ने बठिंडा से हरसिमरत बादल के उतरने की स्थिति में अपनी पत्नी के लिए टिकट मांगा है।

उधर, शिअद और आम आदमी पार्टी की परेशानी अलग तरह की है। शिअद अभी तय नहीं कर पाई है कि हरसिमरत कौर बादल को इस बार बठिंडा से चुनाव मैदान में उतारा जाए या उनकी सीट बदलकर फिरोजपुर भेजा जाए। शेर सिंह घुबाया के कांग्रेस में चले जाने से अकाली दल को बठिंडा या फिरोजपुर किसी एक सीट के लिए प्रत्याशी तय करना है। 

अकाली दल टकसाली में चले गए पार्टी के दिग्गज दोआबा में शिअद के लिए मुश्किल बने हैं। ऐसा ही हाल आप का है। पिछले चुनाव में पार्टी के खाते में चार लोकसभा सीटें आई थीं लेकिन उनमें से अब सिर्फ एक भगवंत मान ही पार्टी के साथ रह गए हैं। बाकी तीनों सीटों पर आप सांसद पार्टी से किनारा कर गए हैं। पटियाला से आप सांसद धर्मवीर गांधी इस बार अपनी पार्टी पंजाब मंच बनाकर पटियाला से चुनाव लड़ेंगे 

हालांकि फतेहगढ़ साहिब से हरजिंदर सिंह खालसा ने दोबारा चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया है। कांग्रेस से गठबंधन करने में असफल रहने के बाद आप इन दिनों अपनी सारी ताकत अकाली दल टकसाली से गठबंधन करने पर लगा रही है। मामला आनंदपुर साहिब सीट पर अटका था, जहां से टकसाली ने अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। आप ने भी इस सीट पर नरेंदर सिंह शेरगिल को प्रत्याशी बना लिया है। अब दोनों पार्टियों के बीच बाकी 12 सीटों पर समझौते की बात चल रही है। 
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