सिद्धू मूसेवाला के फैन पंजाब से लेकर विदेश तक हैं। मूसेवाला की हत्या के बाद मान सरकार कटघरे में है। ऐसा माना जा रहा है कि आम आदमी पार्टी के प्रति युवाओं में खासा रोष है। भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य अमित तनेजा का कहना है कि इस चुनाव में कानून व्यवस्था का मुद्दा काफी अहम था।
पंजाब में संदीप नंगल अंबियां से लेकर सिद्धू मूसेवाला तक की हत्या और रोजाना हो रही गैंगवार और लूटपाट से आम नागरिक काफी परेशान है। सिद्धू मूसेवाला मालवा से थे और मालवा में ही उपचुनाव था। ऐसे में लोगों के रोष व गुस्से के कारण मतदान कम हुआ है।
पंजाब के नेताओं को पॉवरलेस रखना भी अहम कारण
पंजाब में दिल्ली सरकार का हावी होना और पंजाब के नेताओं को पॉवरलेस रखना भी इसका अहम कारणा है। तनेजा का कहना है कि पंजाब में 92 विधायक आम आदमी पार्टी के जीतकर आए हैं। उनको जनता की कसौटी पर खरा उतरना होगा, अगर उनकी सुनवाई नहीं होगी और हर काम दिल्ली से होगा तो स्थानीय लोगों का नाराज होना जायज है। यही एक बड़ी वजह है कि लोग लोकतंत्र के इस पर्व से दूर रहे।
ड्रग, बेअदबी के केसों में कार्रवाई न होने से भी गुस्सा
पंजाब में ड्रग, बेअदबी के केसों में ठोस कार्रवाई न होने से भी लोगों में उत्साह नहीं रहा है। अकाली दल के नेता सुखमिंदर सिंह राजपाल का कहना है कि आम आदमी पार्टी ने चुनावों से पहले लोगों को सपने दिखाए थे। हम आते ही 24 घंटे में ड्रग बेअदबी के केसों में आरोपियों को जेल की सलाखों के पीछे डालेंगे लेकिन उलटा हुआ। लोग सत्ताधारी पार्टी से नाराज हैं।
धान के सीजन के कारण कम मतदान: सीएम
हालांकि सीएम भगवंत मान ने टवीट् किया है कि धान के सीजन के कारण मतदान कम हुआ है। इस पर आम आदमी पार्टी के नेता मंगल सिंह का कहना है कि मालवा किसानों की धरती है और संगरूर सीट में अधिकतर गांव हैं। पंजाब में धान का सीजन चल रहा है और किसान खेतों में अधिक व्यस्त रहे हैं, जिस कारण मतदान का प्रतिशत गिरा है लेकिन आम आदमी पार्टी ने जिस तरह से भ्रष्टाचार पर चोट की है, बड़े बड़े नेताओं को अंदर किया जा रहा है, उससे लोगों में विश्वास सरकार के प्रति बढ़ा है। मंगल सिंह का कहना है कि उनकी ड्यूटी दिबड़ा में थी, जहां पर 40 फीसदी से अधिक मतदान हुआ है।
आप के लिए चुनौती से कम नहीं है संगरूर उपचुनाव
आम आदमी पार्टी के लिए यह उपचुनाव किसी कड़ी चुनौती से कम नहीं है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान का यह गृह इलाका है। पिछले एक सप्ताह से मुख्यमंत्री भगवंत मान, पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व, पंजाब कैबिनेट और विधायकों ने संगरूर लोकसभा क्षेत्र में अपना डेरा डाल रखा था। इस दौरान वादों को पूरा करने का भरोसा दिया।
सियासी जानकार मान रहे हैं कि वोटरों ने इस बार आप सरकार की तीन माह की छोटी सी पारी की कारगुजारी को आधार बनाकर फैसला किया है। कई मुद्दों पर आप सरकार भारी है जबकि कुछ मुद्दे, सरकार पर भारी पड़ते दिखे हैं। युवा मतदाताओं के रुझान पर संगरूर उपचुनाव का दारोमदार टिका दिखाई दे रहा है। युवाओं का उपचुनाव की गतिविधियों से किनारा करना किसी भी सियासी दल पर भारी पड़ सकता है। युवाओं के मन को कोई भी सियासी दल पढ़ नहीं सका फिर भी मुख्यमंत्री भगवंत मान, नौजवान वर्ग को अपनी तरफ आकर्षित करने का कोई मौका नहीं चूके। बहरहाल यहां के चुनाव परिणाम से किसी सरकार पर भले ही कोई असर नहीं पड़ेगा लेकिन उक्त उपचुनाव के नतीजा पंजाब की भविष्य की राजनीति की तस्वीर जरूर तय करेगा। डेरा फैक्टर के प्रभाव में रहने वाली मालवा की इस सीट पर ऐसा पहली बार देखने को मिल रहा है कि उपचुनाव में डेरों या उनके समर्थकों की चर्चा तक नहीं हुई है।