इधर, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, इनेलो ने अपनी ताकत झोंक दी है। अपने अपने गढ़ों में अपने समर्थकों को प्रधान बनाने के लिए अभी लाबिंग शुरू हो गई है। सिरसा जिले में अभय चौटाला के बेटे कर्ण चौटाला को चेयरमैन बनाने के लिए अभय चौटाला कमान संभाले हैं। इसी प्रकार, रोहतक में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हु्ड्डा, सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने अपने समर्थकों के साथ साथ निर्दलीयों को साधना शुरू कर दिया है।
यहां पर भाजपा के पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर भी निर्दलीयों को अपने पाले में लाने के लिए जोर आजमाइश कर रहे हैं। कुरुक्षेत्र में कांग्रेस के अधिक सदस्य जीतने के चलते कांग्रेस यहां पर पूरा जोर लगाए है। पूर्व मंत्री अशोक अरोड़ा निर्दलीयों को बधाई दे रहे हैं। उधर, स्थानीय भाजपा विधायक सुभाष सुधा भी निर्दलीयों को भाजपा में लाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं।
पंचकूला में बेशक भाजपा साफ हो गई लेकिन चेयरमैन बनाने की उम्मीद अभी नहीं छोड़ी। विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता ने निर्दलीय सदस्यों को साधना शुरू कर दिया है। उधर, कांग्रेस के पूर्व डिप्टी सीएम चंद्रमोहन और कालका से विधायक प्रदीप चौधरी निर्दलीयों को कांग्रेस समर्थित बता रहे हैं।
इसी प्रकार, करनाल, पानीपत, यमुनानगर, सोनीपत, जींद, कैथल आदि जिलों में भी तमाम दलों के नेता अपने अपने चेयरमैन बनाने के समीकरणों में जुटे हैं। क्योंकि जिलों में बनने वाली सरकार से ही आगामी 2024 में होने वाले विधानसभा चुनाव का माहौल बनेगा, इसलिए कोई भी दल इसमें कसर नहीं छोड़ रहा है। सभी दलों का दावा है कि उनके सदस्य अधिक जीते हैं और प्रधानी पर भी उन्हीं का कब्जा होगा लेकिन ये तो समय ही बताएगा कि ताज किसके सिर पर सजता है और कौन सा दल इसमें बाजी मारता है।
2016 में खिला था कमल, कांग्रेस हो गई थी साफ
वर्ष 2016 के चुनाव की बात करें तो उस समय भाजपा ने परचम लहराया था और कांग्रेस साफ हो गई थी। हालांकि, पिछली बार भाजपा ने बिना सिंबल के चुनाव लड़ा था। पूर्व सीएम हुड्डा के गढ़ में भाजपा ने अपना चेयरमैन बनाया था। इसके अलावा, भाजाप जिला सिरसा को छोड़कर प्रदेश के सभी 20 जिलों में जिला परिषदों के अध्यक्ष बनाने में सक्षम रही थी।