हाईवे के 500 मीटर के दायरे में आने वाले होटल, बार और रेस्तरां मालिकों को शराब परोसने के लिए जल्द ही सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिल सकती है। मंगलवार को इस मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि शहर के अंदर से गुजरने वाले हाईवे को राज्य सरकार चाहे तो डिनोटिफाई कर सकती है।
इसमें कुछ गलत नहीं हैं। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला नहीं सुनाया है। लेकिन कोर्ट की इस टिप्पणी से होटल व रेस्तरां मालिको को राहत की उम्मीद जगी है। वहीं, यूटी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सबको इंतजार है। फैसले के बाद ही हाईवे को डिनोटिफाई करने के लिए अधिसूचना जारी की जाएगी।
गौरतलब है कि यूटी प्रशासन ने 16 मार्च को शहर के 12 हाईवे को डिनोटिफाई करने को लेकर अधिसूचना जारी की थी। चंडीगढ़ की एनजीओ एराइव सेफ के संस्थापक हरमन सिद्घू ने याचिका दायर कर यूटी प्रशासन के डिनोटिफिकेशन पॉलिसी को पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। लेकिन हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद हरमन सिद्घू ने यूटी प्रशासन के डिनोटिफिकेशन के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट की एपेक्स कोर्ट ने हाईवे के 500 मीटर के दायरे में शराब पर रोक के मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि अगर कोई हाईवे सिटी के बीच से होकर गुजरता है, और उसे डिनोटिफाई किया जाता है तो इसमें कुछ गलत नहीं है।
दिव्यांग हरमन सिद्धू की याचिका पर हुई ‘शराबबंदी’
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इस संबंध में सुप्रीमकोर्ट कोर्ट ने कहा कि सिटी के अंदर के हाईवे और बिना सिटी के हाईवे में बहुत अंतर है। हाईवे का मतलब है जहां तेज रफ्तार में गाड़ियां चलती हों। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईवे के 500 मीटर दायरे में शराब की बिक्री पर रोक के पीछे सोच यह है कि लोग शराब पीकर तेज रफ्तार में गाड़ी ना चलाएं लेकिन सिटी में इस तरह की रफ्तार देखने को नहीं मिलती।
एनजीओ एराइव सेफ के संस्थापक हरमन सिद्घू ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 11 जुलाई तक कुछ सवालों के जवाब मांगे हैं। 11 जुलाई को कोर्ट तय करेगा कि क्या इस तरह हाईवे को डिनोटिफाई किया जा सकता है। दरअसल चंडीगढ़ में कई जगह हाईवे का नाम बदलकर मेजर डिस्ट्रिक रोड का नाम कर दिया गया है।
मध्यमार्ग, सेक्टर-34, 35 और 43 की होटल इंडस्ट्री को राहत
चंडीगढ़ होटल एंड रेस्टरोरेंट्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट अरविंदर पाल सिंह ने कहा कि प्रशासन हाईवे को डिनोटिफाई करने के लिए तैयार है। इससे मध्य मार्ग, सेक्टर-34, 35 और 43 के होटल, बार और रेस्टरोरेंट्स को राहत मिलेगी। होटल व रेस्तरां मालिकों को सुप्रीमकोर्ट के अंतिम फैसले का इंतजार है।
11 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है। कोर्ट ने कुछ सवालो के जवाब मांगे है, उसके बाद ही सुप्रीमकोर्ट अपना फैसला सुनाएगी।
- हरमन सिद्धू, संस्थापक, एराइव सेफ , एनजीओ